फ़िल्म :- जॉली एलएलबी 3
कलाकार :- अक्षय कुमार, अरशद वारसी, सौरभ शुक्ला
निर्देशक :- सुभाष कपूर
रेटिंग :- 3.5/5

संक्षिप्त में जॉली एलएलबी 3 का प्लॉट :-
जॉली एलएलबी 3 दो क्रेजी वकीलों की कहानी है। राजस्थान के परसौल गाँव का किसान राजाराम सोलंकी अपनी पुश्तैनी ज़मीन उद्योगपति हरिभाई खेतान (गजराज राव) को बेचने से इनकार कर देता है। खेतान का सपना है ‘बीकानेर टू बॉस्टन’ नामक प्रोजेक्ट। राजाराम पर अधिकारियों द्वारा फर्जी केस डाल दिया जाता है कि उसने बकाया चुकाने के लिए ज़मीन गिरवी रखी है। मामला स्थानीय अदालत में हारने के बाद राजाराम आत्महत्या कर लेता है। कुछ साल बाद, राजाराम की पत्नी जानकी (सीमा बिस्वास) केस दिल्ली कोर्ट तक ले आती है। यहां दोनों जॉली (अक्षय कुमार और अरशद वारसी) आमने-सामने आते हैं और यहीं से असली ड्रामा शुरू होता है। आगे क्या होता है, वही फिल्म की कहानी है।
जॉली एलएलबी 3 स्टोरी रिव्यू :-
सुभाष कपूर की कहानी बेहद प्रासंगिक है। उनकी पटकथा में हास्य के साथ-साथ कई मार्मिक और सशक्त दृश्य भी शामिल हैं। डायलॉग्स फिल्म की जान हैं, कई डायलॉग थिएटर में तालियाँ बटोरेंगे।
निर्देशन की बात करें तो सुभाष कपूर ने शानदार काम किया है। उन्होंने ऐसा मुद्दा उठाया है जिससे आम जनता आसानी से जुड़ सके। फिल्म में कई वास्तविक घटनाओं और संदर्भों का जिक्र है, जो दर्शकों को चौंकाते भी हैं और हँसी भी दिलाते हैं। दो जॉली के टकराव का अंदाज़ा पहले से था, लेकिन यह जिस तरह से सामने आता है, वह नाटकीय और मज़ेदार है। खासकर कोर्टरूम सीक्वेंस और क्लाइमैक्स दर्शकों को बांधकर रखते हैं। सेकेंड हाफ, फर्स्ट हाफ से कहीं ज्यादा दमदार है।
वहीं कमियों की बात करें तो, फर्स्ट हाफ थोड़ा और बेहतर लिखा जा सकता था। गाने बेहद कमजोर हैं। विरोधी पक्ष (हरिभाई और उनकी टीम) कोर्ट में उतनी मजबूती से लड़ते नहीं दिखते जितनी उम्मीद थी। उनका असली दम कोर्ट के बाहर ही ज़्यादा नज़र आता है।
परफॉरमेंस :-
अक्षय कुमार और अरशद वारसी दोनों ने ज़बरदस्त परफॉर्मेंस दी है। स्क्रीन टाइम भले ही अक्षय का थोड़ा ज्यादा हो, लेकिन अरशद ने अपने अभिनय और खासकर क्लाइमैक्स सीन से बराबरी कर दी है। दोनों की केमिस्ट्री लाजवाब है, खासकर सेकेंड हाफ और फिनाले में। सौरभ शुक्ला (जस्टिस सुंदर लाल त्रिपाठी) एक बार फिर फिल्म के असली हीरो साबित होते हैं। इस बार उनका रोमांटिक अंदाज़ भी देखने को मिलता है जो काफ़ी प्यारा है। गजराज राव एक बार फिर खलनायक के रूप में शानदार हैं और अपनी अदाओं से प्रभाव छोड़ते हैं। अमृता राव (संध्या) और हुमा कुरैशी (पुष्पा) की भूमिकाएँ सीमित हैं, लेकिन यह अच्छी बात है कि निर्माताओं ने पिछली फिल्मों के वही किरदार और कलाकारों को बरकरार रखा। सीमा बिस्वास दिल छू लेती हैं। राम कपूर विपक्षी वकील के रूप में फिट बैठते हैं। शिल्पा शुक्ला (चंचल चौटाला) भी बेहतरीन हैं। बाकी कलाकारों ने भी अच्छा काम किया है।
संगीत और तकनीकी पहलू :
फिल्म के गाने भुला देने लायक हैं। लेकिन मंगेश ढाकड़े का बैकग्राउंड स्कोर फिल्म की शैली के लिए उपयुक्त है।
रंगराजन रमाबद्रन की सिनेमैटोग्राफी शानदार और सिनेमाई है। परवेज़ शेख के एक्शन सीन और वीरा कपूर ई की कॉस्ट्यूम डिज़ाइन वास्तविकता के करीब लगते हैं। मानसी ध्रुव मेहता का प्रोडक्शन डिज़ाइन बिल्कुल सजीव लगता है। चंद्रशेखर प्रजापति की एडिटिंग सधी हुई है, हालांकि शुरुआती हिस्सों में सीन्स का कटिंग ऐसा आभास देता है जैसे कोई फिल्म फेस्टिवल सिनेमा चल रहा हो।
क्यों देंखे जॉली एलएलबी 3 ?
कुल मिलाकर, जॉली एलएलबी 3 हास्य, भावनाओं, दमदार डायलॉग्स और भरपूर ड्रामा के साथ मनोरंजन करती है। अक्षय कुमार, अरशद वारसी और सौरभ शुक्ला अपनी परफॉर्मेंस से दिल जीत लेते हैं, जबकि क्लाइमैक्स थिएटर में तालियाँ बटोरने वाला साबित होगा। बॉक्स ऑफिस पर, फिल्म की शुरुआत भले ही धीमी हो, लेकिन दर्शकों की पॉजिटिव वर्ड ऑफ़ माउथ के चलते शनिवार से इसमें जबरदस्त उछाल आने की पूरी संभावना है।
















