घूमर एक शारीरिक रूप से अक्षम क्रिकेट खिलाड़ी की कहानी है । अनीना (सैयामी खेर) को बचपन से ही क्रिकेट में रुचि रही है । वह अपने पिता (शिवेंद्र सिंह डूंगरपुर), दादी (शबाना आजमी) और भाइयों अनुज (पीयूष रैना) और तिशु (अक्षय जोशी) के साथ रहती है । वह पढ़ाई के दौरान भी अपने खेल को जारी रखती है और भारतीय क्रिकेट टीम की चयन प्रक्रिया के लिए चुनी जाती है । जब वह क्रीज पर होती है, तो एक असफल खिलाड़ी, नशे में धुत पदम सिंह सोढ़ी उर्फ पैडी (अभिषेक बच्चन) के कारण सत्र बाधित हो जाता है । नशे की हालत में वह अनीना को गेंदबाजी करता है और उसे आउट कर देता है । सार्वजनिक रूप से यह निष्कर्ष निकाला जाता है कि वह चयनित होने के लिए अयोग्य हैं । हालाँकि, अनीना का चयन हो जाता है । एक उत्सवपूर्ण रात्रिभोज में, पैडी अपने हिस्से की शराब लेने के लिए आता है । जब वह देखता है कि अनीना चयनित खिलाड़ियों में से एक है, तो वह उसका और उसे चुनने वाले मैनेजमेंट का अपमान करता है । अनीना फूट-फूट कर रोने लगती है और चली जाती है । अपने बॉयफ्रेंड जीनत (अंगद बेदी) की कार से घर लौटते समय उसका एक्सीडेंट हो जाता है । डॉक्टर पूरी कोशिश करते हैं लेकिन उसका दाहिना हाथ नहीं बचा पाते । जाहिर तौर पर अनीना टूट जाती है । चयन टीम उसके रिपलेसमेंट ढूँढना शुरू कर देती है । एक हाथ नहीं होने से अनीना को बोझ जैसा महसूस होता है। उसके जन्मदिन पर पैडी उससे मिलता है । वह एकमात्र ऐसा व्यक्ति है जिसे उस पर दया नहीं आती है और वह उसे बाएं हाथ से एक एक्सपर्ट गेंदबाज बनने की सलाह देता है । अनीना उसके ऑफ़र को रीजेक्ट कर देती है और अपनी हालत का ज़िम्मेदार उसे ही ठहराती है । लेकिन बाद में उसे पैड़ी का आइडिया अच्छा लगता है और वह ट्रेनिंग लेना शुरू करती है । आगे क्या होता है यह पूरी फिल्म देखने के बाद ही पता चलता है ।

आर बाल्की की कहानी (राहुल सेनगुप्ता और ऋषि विरमानी द्वारा सह-लिखित) दिलचस्प है। यह हंगरी के दाहिने हाथ के निशानेबाज कैरोली टैकस की ज़िंदगी से प्रेरित है, जिन्होंने अपने दाहिने हाथ में गंभीर चोट लगने के बाद अपने बाएं हाथ से दो ओलंपिक स्वर्ण पदक जीते थे । आर बाल्की की पटकथा अन्य खेल फिल्मों से अलग है और बहुत मनोरंजक और नाटकीय दृश्यों से भरपूर है । हालाँकि, कुछ घटनाक्रम बहुत त्वरित और असंबद्ध लगते हैं । आर बाल्की के डॉयलॉग्स मजाकिया और शार्प हैं और निश्चित रूप से हंसी लाएंगे।
आर बाल्की का निर्देशन काफी अच्छा है । जहां फ़र्स्ट हाफ़ लगभग 50 मिनट लंबा है, वहीं सेकेंड हाफ़ का रनटाइम लगभग 80 मिनट है । फिर भी, किसी को कोई आपत्ति नहीं है क्योंकि फिल्म में बहुत कुछ हो रहा है। अंग-विच्छेदन से गुज़रने के बाद जिस तरह से उन्होंने अनीना की कठिनाइयों को दर्शाया है वह दिल छू लेता है । उनके ट्रेनिंग के सीन्स मनोरंजक और बहुत आश्वस्त करने वाले हैं । लेकिन जो चीज़ बहुत अच्छी लगती है वह है अनीना और पैडी के बीच के दृश्य । यहां के कुछ यादगार दृश्य हैं, अनीना और पैडी की पहली मुलाकात, डिनर पर पैडी द्वारा अनीना को अपमानित करना, पैडी द्वारा अनीना को अपने पिछवाड़े में झाड़ियां साफ करने और यहां तक कि खाना बनाने के लिए कहना और दिवाली पर अनीना की पैडी से मुलाकात ।
वहीं कमी की बात करें तो, फ़िल्म कई बार बहुत तेज़ लगती है । कुछ घटनाक्रम सुविधाजनक हैं, खासकर क्लाइमेक्स में क्रिकेट मैच में । पैडी, अनीना के सामने एक चौंकाने वाला रहस्योद्घाटन करता है लेकिन इस नाटकीय अनुक्रम के बाद इसके बारे में ज्यादा कुछ नहीं होता है । और फिल्म के साथ बड़ी समस्या यह है कि ट्रेलर में कहानी का बहुत ज्यादा हिस्सा दिखाया गया है । प्रोमो में एक महत्वपूर्ण कथानक बिंदु को भी दर्शाया गया है । फिल्म में इस विकास को लेकर फिल्म में बहुत सारा बिल्डअप होता है । हालाँकि, जब यह स्क्रीन पर आएगी, तो दर्शकों को कोई आश्चर्य नहीं होगा क्योंकि वे इसे पहले ही ट्रेलर में देख चुके हैं ।
अभिनय की बात करें तो अभिषेक बच्चन इसमें शाइन करते हैं । वह पूरी तरह से अपने किरदार में समा जाते हैं और शो में छा जाते हैं । यह कहना गलत नहीं होगा कि यह उनके सबसे सफल प्रदर्शनों में से एक है । सैयामी खेर भी अपना सर्वश्रेष्ठ देती हैं । यह बिल्कुल भी आसान भूमिका नहीं है और यह स्पष्ट है कि एक क्रिकेटर की भूमिका निभाने में उन्होंने अपना खून और पसीना बहाया है । शबाना आज़मी मनमोहक हैं। अंगद बेदी एक सपोर्टिव बॉयफ्रेंड के रूप में अच्छे हैं । पीयूष रैना और अक्षय जोशी वेस्ट हो गए हैं । शिवेन्द्र सिंह डूंगरपुर सभ्य हैं । इवांका दास (रसिका) एक छाप छोड़ती हैं । अमिताभ बच्चन की उपस्थिति अच्छी है। उनका किरदार प्यारा है; हालाँकि, उनके कुछ संवाद सुनने योग्य नहीं हैं । दूसरे अच्छे हैं ।
अमित त्रिवेदी का संगीत कहानी में अच्छी तरह बुना गया है लेकिन चार्टबस्टर किस्म का नहीं है । शीर्षक गीत सबसे यादगार ट्रैक है । 'दिल दम छल्ला', 'तकदीर से टकराव' और 'पूर्णविराम' भावपूर्ण हैं लेकिन ठीक से दर्ज नहीं हो पाते । अमित त्रिवेदी का बैकग्राउंड स्कोर काफी बेहतर है ।
कार वाले दृश्य में विशाल सिन्हा की सिनेमैटोग्राफी कमजोर है लेकिन कुल मिलाकर यह उपयुक्त है। संदीप शरद रावडे का प्रोडक्शन डिजाइन यादगार है, खासकर पैडी हाउस । आयशा मर्चेंट की पोशाकें स्टाइलिश होने के साथ-साथ यथार्थवादी भी हैं। डबल बैरल कम्युनिकेशंस और वीसी स्टूडियोज का वीएफएक्स बढ़िया है। विच्छेदन बिल्कुल वास्तविक लगता है। ध्रुव पी पंजुआनी के खेल निर्देशन का भी विशेष उल्लेख किया जाना चाहिए। निपुण अशोक गुप्ता की एडिटिंग कुछ दृश्यों में बहुत तेज़ है।
कुल मिलाकर, घूमर अभिषेक बच्चन और सैयामी खेर के अभिनय और कुछ अच्छी तरह से निष्पादित दृश्यों पर टिकी हुई है । लेकिन कहानी बहुत तेज़ है और ट्रेलर लगभग पूरी कहानी दिखाता है । इसके अलावा, बॉक्स ऑफिस पर इसे कठिन समय का सामना करना पड़ेगा क्योंकि पिछले हफ्ते की रिलीज गदर 2 और ओएमजी 2 सुपर-मजबूत बनी हुई हैं ।
















