वेब सीरिज :- द बैड्स ऑफ बॉलीवुड
कलाकार :- लक्ष्य, बॉबी देओल, सहर बाम्बा
निर्देशक :- आर्यन खान

संक्षिप्त में द बैड्स ऑफ बॉलीवुड का प्लॉट :-
द बैड्स ऑफ बॉलीवुड एक ऐसे आउटसाइडर की कहानी है जो हिंदी फिल्म हीरो बनने का सपना लेकर मुंबई आता है। आसमान सिंह (लक्ष्य) दिल्ली का रहने वाला है और राजत (विजयंत कोहली) और नीता (मोना सिंह) का बेटा है। वह मुंबई आता है और अपने अंकल अवतार (मनोज पाहवा) के घर ठहरता है। नीता ने 90 के दशक में फिल्म हीरोइन बनने की कोशिश की थी और अवतार ने म्यूज़िक कंपोज़र बनने का सपना देखा था, लेकिन दोनों नाकाम रहे। आसमान को एक फिल्म रिवॉल्वर मिलती है, वो भी वेटरन प्रोड्यूसर फ्रेडी सोडावाला (मनीष चौधरी) के साथ। रिवॉल्वर हिट हो जाती है और सक्सेस पार्टी में फ्रेडी उसे तीन फिल्मों का एक्सक्लूसिव कॉन्ट्रैक्ट ऑफर करता है। आसमान की मैनेजर और दोस्त सन्या (अन्या सिंह) उसे सोचने के लिए कहती है, लेकिन मौका हाथ से निकलने के डर से आसमान कॉन्ट्रैक्ट पर साइन कर देता है और सन्या से इसे छुपा लेता है। इसी बीच सन्या करण जौहर (करण जौहर) को आसमान के लिए राज़ी कर लेती है। करण कुछ सोचने के बाद हामी भरता है। अब आसमान मुश्किल में है, लेकिन फिर भी करण की फिल्म शुरू कर देता है। उसकी को-स्टार है करिश्मा (साहेर बंबा), जो सुपरस्टार अजय तलवार (बॉबी देओल) की बेटी है। अजय नहीं चाहता कि उसकी बेटी आसमान के साथ काम करे और उसे डर है कि दोनों एक-दूसरे से प्यार न कर बैठें। इसलिए वह कोशिश करता है कि आसमान को करण की फिल्म से बाहर कर दिया जाए। वहीं दूसरी तरफ, फ्रेडी भी आसमान पर कॉन्ट्रैक्ट तोड़ने की वजह से गुस्सा है। आगे क्या होता है, यही शो की बाकी कहानी है।
द बैड्स ऑफ बॉलीवुड रिव्यू :-
आर्यन खान, बिलाल सिद्दीकी और मानव चौहान की कहानी पागलपन और एंटरटेनमेंट से भरी है। इनका स्क्रीनप्ले बेहद एंगेजिंग है और हर सीन में कुछ नया होता रहता है। हालांकि, कुछ ख़ामियाँ भी हैं । आर्यन खान के डायलॉग्स (कुछ डायलॉग्स बिलाल और मानव ने लिखे हैं) काफी शार्प हैं और खूब हँसी भी दिलाते हैं।
डायरेक्शन की बात करें तो आर्यन खान ने डेब्यू में ही कमाल कर दिखाया है। उन्होंने कई ट्रैक्स को एक साथ खूबसूरती से जोड़ा है और उनका ह्यूमर इस शो की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री पर तगड़े तंज कसे हैं और कई ऐसे मुद्दे उठाए हैं जो आज के समय में बेहद प्रासंगिक हैं। हाँ, कई जगह उन्होंने हदें पार भी की हैं लेकिन यही इस शो की खूबसूरती है। खासकर क्लाइमैक्स, जो पूरी तरह अप्रत्याशित है और ऑडियंस को झकझोर कर रख देगा।
वहीं कमियों की बात करें तो, शो कई बार लक बाय चांस की याद दिलाता है, खासकर उस हिस्से में जब आउटसाइडर हीरो एक स्टार किड से प्यार करने लगता है। कुछ और जगहें भी हैं जहाँ दर्शक दूसरी पॉपुलर फिल्मों से समानताएं निकाल सकते हैं। लिखाई कुछ दृश्यों में कमजोर है और दर्शक भ्रमित हो जाते हैं- जैसे पहला सीन, जहाँ आसमान और उसका स्टंट बिना बॉडी डबल के खतरनाक स्टंट करते हैं। इंट्रो के लिए अच्छा है, लेकिन विश्वसनीय नहीं। इसके अलावा, करिश्मा को गोवा एपिसोड की मीडिया रिपोर्टिंग घंटों तक न पता होना अविश्वसनीय लगता है। उसके पास स्मार्टफोन है, तो उसे कोई न कोई जरूर बता देता। आसमान का फोन खो जाने के बाद एक हफ्ते तक नया फोन न लेना भी अजीब लगता है। और कुछ प्रोडक्ट प्लेसमेंट तो इतने मजबूरन लगे हैं कि मजाकिया लगते हैं।
द बैड्स ऑफ बॉलीवुड – परफॉरमेंस
लक्ष्य ने लीड रोल बखूबी निभाया है। ये भी फैक्ट है कि वह भी असल ज़िंदगी में एक आउटसाइडर हैं, इसलिए किरदार को और भी प्रभावी बनाता है। बॉबी देओल कभी-कभी एनिमल वाले ज़ोन में लगते हैं, लेकिन कुल मिलाकर उनका अभिनय शानदार है। साहेर बंबा बेहद खूबसूरत लगी हैं और उन्होंने बेहतरीन परफॉर्मेंस दी है। अन्या सिंह भी ग़ज़ब हैं, इन दोनों एक्ट्रेसेज़ को और ज़्यादा फिल्मों में देखा जाना चाहिए। राघव जुयाल (परवेज़) शो की जान हैं। पिछली बार (2024 की किल में) लक्ष्य और राघव एक-दूसरे के खून के प्यासे थे, जबकि यहाँ दोनों घनिष्ठ दोस्त बने हैं और उनकी कैमिस्ट्री देखने लायक है। रजत बेदी (जराज सक्सेना) और मनोज पाहवा तो शो की जान कह सकते हैं । मोना सिंह और विजयंत कोहली के किरदार अहम हैं और उन्होंने अच्छा काम किया है। करण जौहर, मनीष चौधरी और मेहरज़ान माज़दा (जीजीभॉय) भी कहानी को मज़बूती देते हैं। गौतमी कपूर (अनु; अजय की पत्नी) और सुखविंदर सिंह ग्रेवाल (सुखी; बॉडीगार्ड) को ज़्यादा स्कोप नहीं मिला लेकिन ठीक-ठाक हैं। दिविक शर्मा (शौमिक; करिश्मा का भाई) एक पागलपन भरे किरदार में शानदार लगे। उनका रोल जाने तू…या जाने ना (2008) में प्रतीक बब्बर वाले रोल की याद दिलाता है, लेकिन स्टीरॉइड्स पर। अरशद वारसी (ग़फूर) ने कैमियो में कमाल कर दिया है। और सभी कैमियो में शाहरुख़ ख़ान और रणवीर सिंह सबसे शाइन करते हैं ।
द बैड्स ऑफ बॉलीवुड – संगीत और तकनीकी पक्ष
गीत सही जगह पर प्लेस किए गए हैं । रिवॉल्वर और ग़फूर खासतौर पर ध्यान खींचते हैं। बैकग्राउंड म्यूज़िक रोमांचक है। जय पिनाक ओझा की सिनेमैटोग्राफी ठीक-ठाक है। डोनाल्ड रीगन ग्रेसी, अनीता राजगोपालन लता और दिपंकर दासगुप्ता का प्रोडक्शन डिज़ाइन क्लासी है, जबकि मोहित राय और शलीना नथानी की कॉस्ट्यूम डिज़ाइनिंग ग्लैमरस है।
रेड चिलीज़ VFX का काम कुछ जगह (खासतौर पर चेज़ सीक्वेंस) पर कमज़ोर लगता है, लेकिन क्लाइमैक्स के अहम मोमेंट में जबरदस्त है। नितिन बैद की एडिटिंग स्लीक और टाइट है।
क्यों देंखे द बैड्स ऑफ बॉलीवुड ?
कुल मिलाकर, द बैड्स ऑफ बॉलीवुड, बॉलीवुड पर एक बेहद मज़ेदार और मनोरंजक व्यंग्य है। इसकी सबसे बड़ी ताकत है, आर्यन खान का शानदार निर्देशन, पागलपन से भरे मजेदार पल, दमदार परफॉर्मेंस, चौंकाने वाला क्लाइमैक्स और सितारों से सजे कैमियो।
रेटिंग- 3.5 स्टार्स
















