फ़िल्म :- परम सुंदरी

कलाकार :- सिद्धार्थ मल्होत्रा, जान्हवी कपूर, संजय कपूर

निर्देशक :- तुषार जलोटा

रेटिंग :- 3.5/5

Param Sundari Movie Review: फ्रेश कंप्लीट एंटरटेनर है सिद्धार्थ मल्होत्रा और जाह्नवी कपूर की परम सुंदरी ; यूथ कनेक्ट में भी पास

संक्षिप्त में परम सुंदरी का प्लॉट :-

परम सुंदरी एक ऐसे युवक की कहानी है जो परफेक्ट बिज़नेस आइडिया और सच्चे प्यार की तलाश में है। परम (सिद्धार्थ मल्होत्रा) दिल्ली के एक अमीर बिज़नेसमैन (संजय कपूर) का बेटा है। परम ने अब तक कई बिज़नेस और स्टार्ट-अप्स की कोशिश की है, लेकिन कभी भी उसे सफलता नहीं मिली। एक दिन उसे शेखर (अभिषेक बनर्जी) नाम का एक युवक मिलता है, जिसने एक डेटिंग ऐप बनाया है। शेखर को पूरा विश्वास है कि यह ऐप युवाओं को उनका सही साथी खोजने में मदद करेगा। वह चाहता है कि परम इसमें निवेश करे। ऐप की टेस्टिंग के लिए जब परम खुद इसका इस्तेमाल करता है तो उसकी जोड़ी सुंदरी (जान्हवी कपूर) नाम की एक लड़की से मिलती है, जो केरल के एक गाँव में रहती है। ऐप की विश्वसनीयता जानने के लिए परम फैसला करता है कि वह सुंदरी के होम-स्टे में रहकर इसे परखेगा । परम का पिता उसे एक महीने का वक्त देता है कि इस दौरान वह अपने लिए सही जोड़ीदार ढूंढ ले, उसके बाद ही वह ऐप में निवेश करेगा। परम अपने सबसे अच्छे दोस्त जग्गी (मंजोत सिंह) के साथ केरल पहुँच जाता है। शुरू में परम और सुंदरि की बिल्कुल नहीं बनती, लेकिन धीरे-धीरे दोनों एक-दूसरे के करीब आने लगते हैं। लेकिन तभी कहानी में आता है एक बड़ा मोड़, जो परम और सुंदरी की प्रेमकहानी के बीच कांटे की तरह रास्ता रोक देता है । आगे की कहानी के लिए पूरी फ़िल्म देखनी होगी ।

परम सुंदरी मूवी स्टोरी रिव्यू :

तुषार जलोटा, गौरव मिश्रा और आर्ष अरोड़ा की कहानी भले ही नई न लगे, लेकिन तुषार जलोटा की पटकथा इसे फ़्रेशनैस देती है। कहानी को नए अंदाज में पेश किया गया है, जहाँ जैसे-जैसे कपल की नज़दीकियाँ बढ़ती हैं, वैसे-वैसे कुछ दिलचस्प और मज़ेदार पल सामने आते हैं। इंटरवल का ट्विस्ट भी इस जॉनर की फ़िल्मों के लिए नया नहीं है, लेकिन यह दर्शकों को चौंका देता है क्योंकि मेकर्स ने ट्रेलर में इसका कोई संकेत नहीं दिया था। डायलॉग्स बातचीत की तरह लगते हैं, जिनमें स्वाभाविक ह्यूमर है, हालांकि कुछ जगहों पर चीज़ी  लाइनों से बचा जा सकता था।

तुषार जलोटा का निर्देशन भी सादा और ताज़गी से भरा है। उन्होंने पूरी फिल्म को हल्का-फुल्का रखा है और यह सुनिश्चित किया है कि गंभीर ट्विस्ट आने पर भी चीज़ें ज़्यादा बोझिल न हों। सेकेंड हाफ में दो सीन खासतौर पर असरदार हैं—बोट रेस सीन और क्लाइमैक्स। क्लाइमैक्स का ज़िक्र ख़ास है क्योंकि यह बेहद सरल और साफ-सुथरा है। इस तरह की कहानियों में अक्सर अंत भावनात्मक रूप से भारी या मेलोड्रैमेटिक हो जाता है, लेकिन यहाँ ऐसा बिल्कुल नहीं है।

वहीं कमियों की बात करें तो, जैसा कि ऊपर कहा गया, कहानी आज़माई हुई है। ऐसी कई फिल्में पहले बन चुकी हैं, इसलिए क्लाइमैक्स भी आसानी से अनुमान लगाया जा सकता है। रिलीज़ से पहले सोशल मीडिया पर चर्चा थी कि यह फिल्म चेन्नई एक्सप्रेस  और 2 स्टेट्स  जैसी लगेगी। लेकिन वास्तव में यह दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे  की याद ज्यादा दिलाती है, ख़ासकर हीरो के पिता के एंगल और उनके सेकेंड हाफ में किए गए कामों की वजह से।

परफॉरमेंस :-

सिद्धार्थ मल्होत्रा और जाह्नवी कपूर की जोड़ी परफेक्ट लगती है । सिद्धार्थ ने टिपिकल लवर बॉय रोल में अच्छा काम किया है। उनके हाव-भाव और बोलने का अंदाज़ इस जॉनर की फिल्मों में पूरी तरह फिट बैठता है । जान्हवी कपूर बेहद खूबसूरत लगी हैं और आधी मलयाली–आधी तमिलियन लड़की की इमेज पर बिल्कुल खरी उतरी हैं । भावनात्मक सीन और डायलॉग डिलीवरी में उन्होंने अच्छा काम किया है, हालांकि कुछ मौकों पर उनका मलयाली एक्सेंट थोड़ा बनावटी लगता है। संजय कपूर एक एनर्जेटिक परफ़ॉर्मेंस के साथ सरप्राइज़ पैकेज साबित हुए हैं। मंजोत सिंह ने हीरो के दोस्त की वही टिपिकल भूमिका निभाई है जो अक्सर इस तरह की फिल्मों में देखने को मिलती है। वहीं, वेणु का किरदार निभाने वाले रेंजी ने भी बेहतरीन काम किया है।

परम सुंदरी संगीत और अन्य तकनीकी पहलू:

संगीतकार जोड़ी सचिन–जिगर का म्यूज़िक फिल्म के मूड के साथ मेल खाता है। ‘परदेसीया’ एक शानदार लव बैलड है और यह फिल्म का थीम सॉन्ग बन जाता है। ‘डेंजर’ एक मस्तीभरा ट्रैक है जो दर्शकों को थिरकने पर मजबूर करता है। बाकी गाने सिर्फ कहानी को आगे बढ़ाने का काम करते हैं। सचिन–जिगर का बैकग्राउंड स्कोर असरदार है। उन्होंने ‘परदेसीया’ थीम का बार-बार इस्तेमाल किया है और यह स्क्रीन पर अच्छा असर छोड़ता है।

सिनेमैटोग्राफर संथाना कृष्णन रविचंद्रन का काम लाजवाब है। उन्होंने केरल की खूबसूरत वादियों को और भी आकर्षक अंदाज में दिखाया है। आर्ट डायरेक्शन की जिम्मेदारी संभालने वाली एतिशा जैन और प्रियंका घोष रिया ने बेहतरीन और वास्तविक सेट्स तैयार किए हैं। वहीं, नेहा गुरबक्सानी की डिज़ाइन की हुई कॉस्ट्यूम्स किरदारों पर एकदम फिट बैठती हैं।

क्यों देंखे परम सुंदरी ?

कुल मिलाकर परम सुंदरी, एक मनोरंजक बॉलीवुड रोम-कॉम है । कहानी भले ही जानी-पहचानी लगे, लेकिन इसकी प्रस्तुति इसे हल्का-फुल्का और फ्रेश बनाए रखती है। इमोशंस, रोमांस, म्यूज़िक और ड्रामा का संतुलित मेल इसे युवाओं से जोड़ने में सफल रहता है। बॉक्स ऑफिस पर फिल्म की ओपनिंग ठीक-ठाक रहने की संभावना है और इसमें लंबे समय तक थिएटर में अच्छा प्रदर्शन करने की क्षमता है।