कॉलेज लाइफ़ पर बनी फ़िल्मों में कुछ फ़िल्मों ने यकीनन दर्शकों का दिल जीता है । जो जीता वही सिंकदर, जाने तू या जाने न, 3 इडियट्स और स्टूडेंट ऑफ़ द ईयर । और अब इस हफ़्ते सिनेमाघरों में एक और कॉलेज लाइफ़ पर बेस्ड फ़िल्म रिलीज हुई है स्टूडेंट ऑफ़ द ईयर 2, जो कि साल 2012 में आई स्टूडेंट ऑफ़ द ईयर का दूसरा भाग है । जहां स्टूडेंट ऑफ़ द ईयर से सिद्धार्थ मल्होत्रा, वरुण धवन और आलिया भट्ट ने बॉलीवुड में कदम रखा वहीं स्टूडेंट ऑफ़ द ईयर 2 से अनन्या पांडे और तारा सुतारिया बॉलीवुड में कदम रख रही है और इसमें उनका साथ दे रहे हैं टाइगर श्रॉफ़ । तो क्या पुनीत मल्होत्रा के निर्देशन में बनी फ़ि्ल्म स्टूडेंट ऑफ़ द ईयर 2 दर्शकों का मनोरंजन करने में कामयाब होगी या यह अपने प्रयास में विफ़ल हो जाएगी, आइए समीक्षा करते है ।

स्टूडेंट ऑफ़ द ईयर 2 मूवी रिव्यू : दिल के तारों को छूती है ये फ़िल्म

स्टूडेंट ऑफ़ द ईयर 2, विजय, प्यार और कमबैक की कहानी है । रोहन (टाइगर श्रॉफ) और मृदुला (तारा सुतारिया) एक साथ पिशोरी चमनलाल कॉलेज में पढ़ते हैं । दोनों प्यार में हैं और एक समय आता है जब मृदुला अपना कॉलेज बदलती है और प्रतिष्ठित सेंट टेरेस कॉलेज में दाखिला लेती है । रोहन भी इस कॉलेज में भर्ती होना चाहता है, लेकिन यह जानते हुए कि वहाँ की फीस बहुत महंगी है, वह अपनी इच्छा छोड़ देता है । लेकिन वह हार नहीं मानता है और स्पोर्ट्स कोटा के तहत एडमिशन लेने के लिए अपनी किस्मत आजमाता है । और आखिरकार रोहन को कॉलेज में एडमिशन मिल जाता है । लेकिन वहां जाकर रोहन देखता है कि मृदुला बदल गई है और अब वह खुद को मिया कहती है । साथ ही रोहन से भी एक दूरी बना लेती है । लेकिन कुछ समय बाद रोहन फ़िर से मृदुला का दिल जीत लेता है और फ़िर से दोनों एक हो जाते है । इस बीच, रोहन को टेरेस के स्टड और स्टार एथलीट, मानव मेहरा (आदित्य सील) से मिलवाया जाता है । वे जल्दी ही दोस्त बन जाते हैं लेकिन मानव की बहन श्रेया (अनन्या पांडे) उसे रोक देती है । एक दिन कॉलेज में डांस कॉम्पटिशन होता है रोहन-मिया एक टीम के रूप में पार्ट लेते हैं वही मानव और श्रेया एक टीम के रूप में हिस्सा लेते है । दोनों लड़कियों के लिए, प्रतियोगिता जीतना बहुत महत्वपूर्ण है । मिया लोकप्रियता हासिल करना चाहती हैं और श्रेया, अपने अत्याचारी पिता श्री रंधावा (चेतन पंडित) के चंगुल से बचना चाहती है और अपने अति-अभिमानी भाई मानव और लंदन के एक डांस स्कूल में दाखिला लेना चाहती है । प्रतियोगिता के दौरान, मानव और श्रेया जीत जाते हैं और रोहन-मिया हार जाते है । मिया टूट जाती है और जब रोहन उसे सांत्वना देने जाता है तो वह मिया और मानव को करीब देखता है । गुस्से में रोहन मानव को मारता है । लेकिन रोहन का ये कदम उसे मुश्किल में डाल देता है । इसके बाद आगे क्या होता है, यह आगे की फ़िल्म देखने के बाद ही पता चलता है ।

पॉलोमी दत्ता द्वारा अतिरिक्त इनपुट्स के साथ अरशद सैयद की कहानी कोई नई और अनूठी नहीं है । हालाँकि, यह इस शैली को ध्यान में रखते हुए लिखी गई है । हालांकि, अरशद सैयद की पटकथा मनोरंजक, नाटकीय है । हालाँकि शुरुआत थोड़ी विषम है । अरशद सैयद के संवाद मजाकिया हैं और कुछ वन लाइनर्स अट्टहास लगाने योग्य है ।

पुनीत मल्होत्रा का निर्देशन उपयुक्त है । वह फ़िल्म के प्लॉट के साथ पूरा न्याय करते है । उनके लिए यह काफ़ी मुश्किल था क्योंकि पहले भाग को करण जौहर ने काफ़ी अच्छे से तैयार किया था, लेकिन पुनीत इस मामले में जरा भी निराश नहीं करते है । वहीं कुछ जगहों पर वह लड़खड़ा से जाते है । सेकेंड हाफ़ में श्रेया का हिस्सा पचा पाना मुश्किल है । इसके अलावा मिया का ट्विस्ट चकरा देने वाला है जो कई सवाल खड़े करता है ।

स्टूडेंट ऑफ़ द ईयर 2 की शुरूआत इतनी अच्छी नहीं होती है । शुरूआती पल दर्शकों को बांधकर नहीं रखते है । लेकिन जब रोहन सेंट टेरेस में एडमिशन लेता है तब फ़िल्म में रूचि जागती है । पिशोरी और सेंट टेरेस के बीच की विपरीत स्थिति को अच्छी तरह से चित्रित किया गया है । इसके अलावा, रोहन नए परिवेश में समायोजित होने के दौरान जिन मुद्दों का सामना करता है और जिस तरह से वह उस माहौल में सेट होने के लिए अपनी वॉर्डरोब को चेंज करता है, यह विश्वसनीय है । जेफरी का दृश्य मज़ेदार है लेकिन फ़र्स्ट हाफ़ में मिस्टर रंधावा का श्रेया को थप्पड़ मारना देखने लायक है । यह सीन फ़िल्म को एक अलग स्तर पर ले जाता है । इंटरमिशन प्वाइंट पर आया सीन काफ़ी प्रभावपूर्ण है । सेकेंड हाफ़ और बेहतर हो जाता है जब रोहन अपने जिंदगी के सपने को बदलता है । कुछ सीन तो बेहद शानदार है जैसे- श्रेया अपना जन्मदिन अकेले मनाती है, रोहन, श्रेया और मिया कैफ़े में बहस करते हैं,और कॉलेज स्टेडियम में फ़ाइट सीन । फ़िल्म का क्लाइमेक्स सीट से चिपकाने वाला है, हालांकि यह अनुमान लगाने योग्य है, लेकिन फ़िर भी देखने लायक है ।

टाइगर श्रॉफ पूरी तरह से फ़ॉर्म में लगते हैम और शानदार परफ़ोर्मेंस देते है । स्क्रीन पर उनकी मौजूदगी आकर्षित करती है । एक्शन सीन में, टाइगर के एक्शन पोटेंशियल को पूरी तरह से इस्तेमाल करने के लिए पुनीत मल्होत्रा की तारीफ की जानी चाहिए और साथ ही इसे फिल्म की कहानी का हिस्सा बनाना चाहिए । अनन्या पांडे एक पूरी स्टार हैं और वह इसे साबित करती हैं । वह एक घमंडी रईस लड़की के किरदार में खूब जंचती है । अभिनय के मामले में वह दिल जीत ले जाती है । तारा सुतारिया अपना डेब्यू शानदार ढंग से करती है । लेकिन अफ़सोस सेकेंड हाफ़ में वह थोड़ी दरकिनार सी हो जाती है । बुरे लड़के के रूप में आदित्य सील छा जाते । हर्ष बेनीवाल (पुग्गी) काफी मनोरंजक हैं और हंसी लेकर आते है । आयशा रज़ा (प्रिंसिपल सिंह) और मनोज पाहवा (कोच महिपाल) थोड़े ओवर लगते हैं लेकिन किरदार की आवश्यकता अनुसार ठीक है । समीर सोनी (प्रिंसिपल गुजराल) मजाकिया होने की कोशिश करते लेकिन असफल रहते है । गुल पनाग (कोच कुलजीत) एक छोटी सी भूमिका में छा जाती है । विल स्मिथ को कुछ सेकंड के लिए दिखाया जाता है और आलिया भट्ट हुक अप सॉंग में ग्लैमर का तड़का लगाती है ।

विशाल-शेखर का संगीत उतना बढ़िया नहीं है । पहले भाग में बहुत यादगार गाने थे जबकि इसमें गानों का स्तर नीचे गिर गया है । 'द जवानी सॉन्ग' बेहतरीन और सबसे मनोरंजक है । 'द हुक अप सॉन्ग' अंत क्रेडिट में दिखाई देता है, और ठीक है । सलीम-सुलेमान का पृष्ठभूमि स्कोर ऊर्जावान और नाटकीय है ।

रवि के चंद्रन की सिनेमैटोग्राफी आकर्षक है और फिल्म को शानदार रूप देती है । रेमो डिसूजा (जवानी गीत), आदिल शेख ('फकीरा’ और 'जट लुधयिना दा’) और फराह खान (हुक अप गीत) तीनों की कोरियोग्राफी देखने लायक है । सुमैया शेख का प्रोडक्शन डिज़ाइन फ़िल्म के आकर्षण को बढ़ाता है । मनीष मल्होत्रा और निकिता जयसिंघानी की वेशभूषा भी आकर्षक है । शाम कौशल के एक्शन तर्क के परे से हैं लेकिन इस शैली की फ़िल्मों में अच्छे से काम करते है । रितेश सोनी का संपादन सराहनीय है । फिल्म लगभग 145 मिनट लंबी है, लेकिन यह लंबी नहीं लगती है ।

कुल मिलाकर, स्टूडेंट ऑफ़ द ईयर 2 एक मनोरंजक और आनंददायक फ़िल्म है जो दर्शकों के दिल के तारों को छू लेगी । बॉक्सऑफ़िस पर यह फ़िल्म अच्छा प्रदर्शन करने की क्षमता रखती है ।