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डांस शैली की फ़िल्में अब बॉलीवुड फ़िल्मों में एक लोकप्रिय शैली में से एक हो गई है । रेमो डिसूजा द्दारा निर्देशित ABCD ने इस शैली की फ़िल्मों को अलग आयाम दिया है । इस फ़िल्म को न केवल सभी ने साराहा बल्कि बॉक्सऑफ़िस पर भी इस फ़िल्म ने शानदार प्रदर्शन किया । साल 2015 में वरुण धवन और श्रद्धा कपूर की ABCD – ANY BODY CAN DANCE – 2 ने बॉक्सऑफ़िस पर 100 करोड़ का आंकड़ा पार कर इतिहास रच दिया । और अब एक बार फ़िर रेमो, वरुण और श्रद्धा तीनों मिलकर डांस की अब तक की सबसे बड़ी फ़िल्म लेकर आए हैं, स्ट्रीट डांसर 3डी, जो इस हफ़्ते सिनेमाघरों में रिलीज हो रही है । तो क्या स्ट्रीट डांसर 3डी दर्शकों के दिलों पर राज करने में कामयाब हो पाती है या यह अपने प्रयास में विफ़ल होती है ? आइए समीक्षा करते है ।

Street Dancer 3D Review: एक शानदार ट्रीट की तरह है वरुण धवन-श्रद्धा कपूर की स्ट्रीट डांसर 3डी

स्ट्रीट डांसर 3डी, दो ग्रुप्स की कहानी है, जो डांस के साथ एक बड़ी पहल के लिए एकजुट होते हैं । सहज (वरुण धवन) एक भारतीय मूल का ब्रिटिश निवासी हैं जो अपने परिवार के साथ लंदन में रहता है । वह और उसका भाई इंदर (पुनीत जे पाठक) स्ट्रीट डांसर्स नामक एक डांस ग्रुप का हिस्सा हैं । इंदर ने ग्राउंड जीरो नामक एक विश्व स्तर पर प्रतिष्ठित डांस परफ़ोर्मेंस में भाग लिया था । लेकिन दुख की बात है कि, अपने फ़िनाले एक्ट के दौरान वह घायल हो जाता है और उसका घुटना टूट जाता है । दो साल बाद, सहज एक शादी के लिए पंजाब जाता है । वह बहुत पैसा लेकर लौटता है जिसका उपयोग वह डांस स्टूडियो खरीदने के लिए करता है । सहज स्ट्रीट डांसर्स गैंग को फिर से संगठित करता है । उसी इलाके में, एक अन्य डांस ग्रुप है जिसका नाम है, रूल ब्रेकर्स । वे पाकिस्तानी मूल के हैं और उनमें इनायत (श्रद्धा कपूर), ज़ैन (सलमान यूसुफ खान) शामिल हैं । उनका नृत्य काफी बेहतर है लेकिन ये दोनों ग्रुप अक्सर झगड़े में पड़े रहते है । सहज को महसूस होता है कि स्ट्रीट डांसर ग्रुप को अपने डांस मूव्स और बेहतर करने होंगे । वह नोरा (नोरा फतेही) की मदद लेता है, जो एक ब्रिटिश डांस ग्रुप में डांस करती है जिसे द रॉयल्स कहा जाता है और वह उसकी प्रेमिका भी है । वह सहज के ग्रुप के डांस में काफ़ी सुधार करती है । स्ट्रीट डांसर्स और रूल ब्रेकर्स अक्सर भारत बनाम पाकिस्तान क्रिकेट मैच देखने के लिए प्रभु अन्ना (प्रभुदेवा) द्वारा संचालित एक रेस्तरां में इकट्ठा होते हैं । कई बार झगड़ा इतना बढ़ जाता है कि वह एक-दूसरे पर भोजन फ़ेंककर हमला करते है । फ़िर उनके बीच झगड़े को कोई पुलिस वाला (मुरली शर्मा) आकर शांत कराता है । वहाँ से निकलते समय, इनायत कुछ संदिग्ध व्यक्तियों को रेस्तरां के पिछले दरवाजे से प्रवेश करते हुए देख लेती है । अपनी अगली बार फ़िर ऐसा होते हुए देखती है और वह ये सब प्रभु को बताती है । फ़िर प्रभु बताता है कि ये लोग भारतीय उपमहाद्वीप से अवैध प्रवासी हैं और वह उन्हें बचा हुआ भोजन देते हैं। इतना ही नहीं, वह सभी बचे हुए व्यंजनों को पैक करता है और उन्हें एक कॉलोनी आवास अवैध आप्रवासियों को वितरित करता है । ये बात इनायत के दिल को छू देती है । इसी बीच ग्राउंड जीरो प्रतियोगिता फ़िर से घोषित हो जाती है और इसकी जीत की धनराशि चौंकाने वाली है । इनायत अपने ग्रुप को आप्रवासियों की दुर्दशा के बारे में बताती है । वे सभी तय करते हैं कि यदि वे ग्राउंड ज़ीरो जीतते हैं, तो वे पुरस्कार राशि का उपयोग इन लोगों को उनके देश वापस लौटने में मदद करने के लिए करेंगे । स्ट्रीट डांसर्स भी ग्राउंड ज़ीरो में भाग लेने का फैसला करते हैं । प्रभु अन्ना दोनों समूहों को एकजुट होने की सलाह देते हैं क्योंकि वे उन्हें जीतने में मदद करेंगे । इसके बाद आगे क्या होता है, यह आगे की फ़िल्म देखने के बाद पता चलता है ।

रेमो डिसूजा की कहानी कोई अनूठी नहीं है । कुछ सीन बहुत अच्छे हैं लेकिन बाकि के अनुमान लगाने योग्य है । हालांकि, तुषार हीरानंदानी की पटकथा (जगदीप सिद्धू की अतिरिक्त पटकथा) काफी मनोरंजक और बहुत सरल है । इतने सारे किरदारों और इतने डांस के बावजूद क्या चल रहा है, यह समझना आसान है । कुछ नाटकीय क्रम विशेष रूप से अच्छी तरह से लिखे गए हैं । फरहाद सामजी के डयलॉग्स (जगदीप सिद्धू के व्यंग्यात्मक संवाद) अच्छी तरह से काम करते हैं, लेकिन इस प्रतिभाशाली लेखक से कुछ मजाकिया वन-लाइनर्स की उम्मीद होती है ।

रेमो डिसूजा का निर्देशन कई जगहों पर अच्छे से काम करता है । डांस सीक्वंस को अच्छे से हैंडल किया गया है । वह विशेष रूप से टकराव के दृश्यों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हैं, जैसे-मैक (फ्रांसिस रफली) का पोड्डी पर धावा बोलना, पोड्डी-सहज का झगड़ा । सहज का इमोशनल मोमेंट और सहज का इनायत की फ़ैमि्ली के सामने स्पीच देना इत्यादि । इसके विपरीत फ़िल्म 143 मिनट लंबी है । फ़र्स्ट हाफ़ को थोड़ा छोटा किया जा सकता था । इसके अलावा कुछ सीन देखकर लगता कि कुछ सीन को लॉजिक के साथ हैंडल किया जाता तो प्रभाव बढ़ जाता । ये देखना हैरान करने वाला है कि आखिर क्यों अमरिंदर (अपारशक्ति खुराना) और उनके दोस्त लंदन में हुए बुरे एक्सपीरियंस का ठीकरा सहज पर फ़ोड़ते है । जबकि अमरिंदर और उसके दोस्त ही सहज को जबरन लंदन लेकर जाते हैं । इसलिए सहज को लंदन में हुए बुरे अनुभव से खुद को दोषी नहीं समझना चाहिए था । क्लाइमेक्स में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिल सकता है । शुक्र है, फ़िल्म में कई सारी खूबियां है जो फ़िल्म की कमियों को नजरअंदाज करती है ।

स्ट्रीट डांसर 3डी की शुरूआत विजुअली काफ़ी आकर्षक नोट पर होती है । परिचय सीन को अच्छे से शूट किया जाता है ये सोचकर की ये फ़िल्म का मूड सेट करेगा और ऐसा ही होता है । इनायत का परिचय सीन काफ़ी मजेदार है वहीं नोरा का एंट्री सीन भी इस ठंडी के मौसम में तापमान को बढ़ा देगा । यहां तक फ़िल्म में कुछ खास नहीं होता है । फ़िल्म में दिलचस्पी तब बढ़ती है जब सहज अपने पंजाब एक्सपीरियंस को साहेब पोड्डी (राघव जुयाल) को बताता है और यहां से फ़िल्म में दिलचस्पी बढ़ती है । इंटरमिशन प्वाइंट एकदम अहम मोड़ पर आता है । इंटरवल के बाद फ़िल्म थोड़ा बिखर जाती है लेकिन फ़िर यहां एक अच्छा प्लॉट है जब सहज स्ट्रीट डांसर्स से अलग हो जाता है । यह ट्रेक अच्छा काम करता है । परदेश में बसना टचिंग है लेकिन लॉजिकली इसमें खामियां है जो प्रभाव को कम करती है । सेमीफ़ाइनल सीक्वंस का तालियों और सीटी से स्वागत किया जाना निश्चित है । फ़ाइनल सीन में ढेर सारा ड्रामा है जो दर्शकों को बांधे रखने का काम करता है । फ़िल्म का अंत दिल छू लेने वाले मोड़ पर होता है जिसमें स्वाट (सिख वेलफेयर एंड अवेयरनेस टीम) का लंदन में उनके नेक काम को दिखाया जाता है ।

अभिनय की बात करें तो, वरुण धवन हमेशा की तरह मनोरंजक है और स्क्रीन पर उनकी उपस्थिती शानदार लगती है । वह काफ़ी डेशिंग लगते है । जब वह डांस करने आते हैं तो श्रद्धा कपूर और नोरा फतेही की तुलना में,उनके लिए खूब तालियां बजती है । श्रद्धा कपूर शानदार लगती हैं और उन्हें इस रूप में देखना एक ट्रीट की तरह लगता है । हालांकि सेकेंड हाफ़ में उनका स्क्रीन टाइम थोड़ा सीमित है । दर्शक ये देखकर और खुश हो जाते यदि उन्हें वरुण और श्रद्धा के बीच रोमांस देखने को मिलता । नोरा फ़तेही का रोल काफ़ी छोटा है लेकिन यह बहुत महत्वपूर्ण है और यकीनन बाटला हाउस से बड़ा रोल है । वह काफ़ी हॉट लगती हैं और उनका एंट्री सीन सभी कलाकारों में से सर्वश्रेष्ठ है । अपारशक्ति खुराना बेहतरीन लगते हैं और कहीं भी ओवर नहीं लगते है । प्रभु देवा काफ़ी सहज लगते हैं । उनका डांस का हिस्सा थोड़ा लेट आता है लेकिन यह फ़िल्म को एक अलग स्तर पर ले जाता है । पुनीत जे पाठक यादगार हैं । सलमान यूसुफ खान, राघव जुयाल, धर्मेश येलोंड (डी), सुशांत पुजारी (शुशी), कैरोलीन वाइल्ड (अलीशा) समेत सभी डांसर्स ने अच्छा काम किया है । इसके अलावा बाकी के सभी कलाकार अच्छे हैं । जरीना वहाब (अमरिंदर की मां), मुरली शर्मा और मनोज पाहवा (चबदा) ठीक हैं ।

फिल्म में लगभग 10-11 गाने हैं और उनमें से ज्यादातर अच्छी तरह से कोरियोग्राफ किए गए हैं जो एक अच्छा प्रभाव डालते हैं । 'मुक़ाबला' सबसे बेहतरीन हैं और सिंगल स्क्रीन सिनेमाघरों में ये झूमने पर मजबूर करेगा । इसके बाद 'मिले सुर मेरा तुम्हारा' , 'बेजुबान कब से', 'पिंड' और 'गुरमी' आते हैं । 'गण देव' जबरदस्ती का जोड़ा गया लगता है, जबकि 'सुनो गौर से दुनिया वालो' फ़िल्म से गायब है । 'दुआ करो' अच्छी तरह से शूट किया गया है । 'इलिगल वैपन 2.0', 'लगदी लाहौर दी' और 'नाची नाची' ठीक हैं । सचिन-जिगर का बैकग्राउंड स्कोर थोड़ा लाउड है लेकिन फिल्म के मूड के अनुरूप है ।

कृति महेश, राहुल शेट्टी और टशन मुइर की कोरियोग्राफी फ़िल्म के हाईप्वाइंट्स में से एक है । हर एक डांस पीस एकदम अनूठा है जिसे देखना अच्छा लगता है । विजय कुमार अरोड़ा की सिनेमैटोग्राफी (तुषार कांति रे द्वारा शूट किया गया पंजाब शेड्यूल) बिना किसी शिकायत के है और डांस सीन्स को खूबसूरती से कैप्चर किया गया है । तन्वी लीना पाटिल का प्रोडक्शन डिजाइन आकर्षक है । वेशभूषा काफी सेक्सी हैं विशेष रूप से वरुण (अकी नरूला), श्रद्धा (तान्या घावरी) और नोरा फतेही (जैरी डिसूजा) द्वारा पहनी गई । पोस्ट हाउस स्टूडियो के VFX ने यहां एक प्रमुख भूमिका निभाई है । धीमी गति और प्रकाश प्रभाव विशेष रूप से प्रभाव को बढ़ाते हैं । यहां तक कि 3डी एक विजुअल ट्रीट है । मनन अजय सागर का संपादन ज्यादातर हिस्सों के लिए अच्छा है, लेकिन इससे और कसा हुआ हो सकता था ।

कुल मिलाकर, स्ट्रीट डांसर 3डी शानदार विजुअल्स, अद्भुत कॉरियोग्राफ़ी और दमदार इमोशंस का बेहतरीन मेल है । बॉक्सऑफ़िस पर यह फ़िल्म अपने लक्षित दर्शक-नौजवान, जुटाने में कामयाब होगी । यह संभवतः 100 करोड़ क्लब में शामिल होगी ।