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जैसे ईद सलमान खान की फ़िल्मों का पर्याय बन चुकी हैं वैसे ही स्वतंत्रतादिवस यानी 15 अगस्त अक्षय कुमार की देशभक्ति से भरी फ़िल्मों के लिए रिजर्व है । साल 2013 से 2018 में (2014 को छोड़कर) जब-जब अक्षय कुमार की फ़िल्म 15 अगस्त पर रिलीज हुई, तब-तब उनकी फ़िल्मों ने बॉक्सऑफ़िस पर इतिहास रच दिया । और अब इसमें साल 2019 भी शामिल होने जा रहा है क्योंकि इस 15 अगस्त सिनेमाघरों में रिलीज हुई है मिशन मंग़ल, जो कि भारत के सफ़ल मंग़ल मिशन की यात्रा की सच्ची घटना को पर्दे पर पेश करती है । भारतीय इतिहास के इस सफ़ल अध्याय पर बनी इस फ़िल्म में अक्षय के साथ विद्या बालन, सोनाक्षी सिन्हा, तापसी पन्नू, कीर्ती कुल्हारी, नित्या मेनन और शरमन जोशी भी अहम भूमिका में नजर आएंगे । जगन शक्ति के निर्देशन में बनी मिशन मंग़ल में एक ब्लॉकबस्टर की सभी खूबियां हैं या नहीं, क्या ये फ़िल्म उम्मीद के मुताबिक रोमांचक और मनोरंजक साबित होगी ? इन सभी सवालों के जवाब जानने के लिए आइए हम फ़िल्म की समीक्षा करते हैं ।

Mission Mangal Movie Review: 15 अगस्त पर प्राउड फ़ील कराती है अक्षय कुमार- विद्या बालन की मिशन मंगल

मिशन मंगल, भारत के सफ़ल मंगल ग्रह के मिशन के पीछे की अविश्वसनीय सच्ची कहानी है । फिल्म 2010 में शुरू होती है । भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) में, राकेश धवन (अक्षय कुमार) और उनकी टीम तारा शिंदे (विद्या बालन) एक आयोजित अंतरिक्ष मिशन के असफल होने के बाद उसकी कमियों की जांच करते हैं । एक सजा के तौर पर उन्हें भारत के मंगल मिशन को हैंडल करने का जिम्मा सौंपा जाता है, जो हाल फ़िलहाल पूरा होने की उम्मीद नहीं है । कुछ दिनों बाद तारा ने अपने घर में पूरियां पकाते समय एक यूरेका मोमेंट किया । उस दौरान तारा को पता चलता है कि अभिनव तरीकों के माध्यम से, वे हमारे उपग्रह को मंगल पर केवल दो वर्षों में पहुंचाने की कोशिश कर सकते हैं । वह राकेश को योजना के बारे में बताती है और उसे लगता है कि ये एक सुनहरा अवसर है । राकेश अर्पूवल के लिए अपने वरिष्ठ (विक्रम गोखले) से संपर्क करते हैं जिन्हें ये आईडिया अच्छा नहीं लगता है । साथ ही रूपर्ट देसाई (दिलीप ताहिल) जो इसरो में शामिल होने के लिए नासा से आए हैं, उन्हें लगता है कि राकेश का विचार हास्यास्पद है । राकेश जैसे-तैसे सभी को मना लेता है और इस मिशन पर काम शुरू कर देता है । वह इस प्रोजेक्ट में शामिल होने के लिए इसरो के सबसे श्रेष्ठ लोगों को शामिल होने के लिए कहता है । लेकिन उसे इस मिशन के लिए अनुभवहीन सहयोगी दे दिए जाते हैं जिनमें शामिल हैं- कृतिका अग्रवाल (तापसी पन्नू), ईका गांधी (सोनाक्षी सिन्हा), वर्षा गौड़ा (नित्या मेनन), नेहा सिद्दीकी (कीर्ति कुल्हारी) और परमेश्वर नायडू (शरमन जोशी) और एक बहुत ही वरिष्ठ कर्मचारी अनंत अय्यर (एचजी दत्तात्रेय)। आगे क्या होता है यह बाकी की फ़िल्म देखने के बाद पता चलता है ।

जगन शक्ति की कहानी शानदार है और बहुत चुनौतीपूर्ण भी है । इस तरह के प्लॉट के साथ मैनस्ट्रीम की फ़िल्म बनाना आसान काम नहीं है । भारत के मंगल मिशन के निर्माण के पीछे क्या-क्या हुआ और कैसे ये अंजाम तक पहुंचा, इसके बारे में भी बहुत से लोगों को जानकारी नहीं हो सकती है । इसलिए उन लोगों के लिए इस सफ़ल मंगल यात्रा को देखना रोमांचक होगा । प्लॉट में इतने सारे टर्न एंड ट्विस्ट्स हैं कि किसी को विश्वास नहीं होगा कि वास्तव में ये सब असल में घटित हुआ । आर बाल्की, जगन शक्ति, निधि सिंह धर्म और साकेत कोंडिपाठी की पटकथा न केवल कार्यवाही को सरल बनाती है, बल्कि इसे व्यापक भी बनाती है । पटकथा विज्ञान और मनोरंजन को अच्छे से मिक्स कर देती है । फिल्म बहुत ही आसानी से दर्शकों से जुड़ती है । आर बाल्की, जगन शक्ति, निधि सिंह धर्म और साकेत कोंडिपाठी के डायलॉग्स प्रभावी और मजेदार हैं ।

निर्देशन में पहली पारी को देखते हुए जगन शक्ति का निर्देशन बहुत शानदार है । उनके हाथ में एक विजयी कहानी की पटकथा थी जिसे उन्होंने अपने शान दार निर्देशन से एक अलग स्तर पर पहुंचा दिया है । इस फ़िल्म में हर एक किरदार के कई सबप्लॉट्स भी हैं जो फ़िल्म की कहानी में अच्छे बुने गए है । और इन सबप्लॉट्स के माध्यम से भी, निर्माता ने धर्म, पालन-पोषण, विवाह, धार्मिक पूर्वाग्रह आदि के बारे में कुछ महत्वपूर्ण टिप्पणियां की हैं और ये सभी फिल्म में बहुत योगदान देते हैं ।

मिशन मंगल कुछ बेहतरीन प्रदर्शनों से सजी फ़िल्म है । अक्षय कुमार टॉप फॉर्म में हैं । वह इस तरह की शानदार भूमिका को बखूबी निभाते हैं और अपने किरदार में पूरी तरह समा जाते हैं । और वह पूरी फिल्म में छा जाते हैं ! जिस तरह से उनका किरदार कभी गंभीर होता है तो कभी माहौल को हल्का बनाता है, विश्वास करने योग्य है । फिल्म का एक सबसे बड़ा सीक्वंस तब आता है जब वह एपीजे अब्दुल कलाम को एक काल्पनिक कॉल करते हैं । विद्या बालन फ़र्स्ट हाफ़ में अपनी परफ़ोर्मेंस से छा जाती हैं और टी का किरदार उन पर बहुत जंचता है । यह भी सराहनीय है कि उन्होंने एक टीनेजर की मां की भूमिका निभाने से कोई परहेज नहीं किया । सोनाक्षी सिन्हा प्यारी लगती हैं और फ़िल्म में शाइन करती हैं । यह देखना शानदार है कि वह सपोर्टिंग रोल में अमिट प्रभाव छोड़ती हैं । तापसी पन्नू भी काफी कुशलता से अपना किरदार निभाती है और क्लाइमेक्स में अपना सबसे बेहतर देती हैं । नित्या मेनन की छोटी भूमिका है, लेकिन यह उनका एक अच्छा डेब्यू है । कीर्ति कुल्हारी अच्छी तरह से अपना रोल निभाती हैं और कई लोग उनके संघर्षों से रिलेट करेंगे । शरमन जोशी फ़नी हैं और निश्चित रूप से दर्शकों के चेहरे पर स्माइल लाएंगे । एच जी दत्तात्रेय मनमोहक हैं और वह दृश्य जहां वह कीर्ति के पूर्व पति को सबक सिखाते हैं, बहुत अच्छा है ! दिलीप ताहिल निराशावादी के रूप में उपयुक्त है । संजय कपूर (सुनील शिंदे) फिल्म का सरप्राइज़ है । वह एक अच्छा प्रदर्शन और इंटरवल के बाद ऐसे मोड में आ जाते हैं जिसको देख दर्शककों का सिनेमाघरों में सीटी और ताली बजाना निश्चित है । पूरब कोहली (विवेक) और मो जीशान अय्यूब (ऋषि) सक्षम समर्थन देते हैं । रोहन जोशी (दिलीप शिंदे) विद्या बालन के बेटे के रूप में प्रफुल्लित करने वाले है । कश्मीरा परदेशी (आन्या शिंदे) को ज्यादा करने की कोई गुंजाइश नहीं है । विक्रम गोखले सभ्य हैं । बाकी सभी अपने-अपने किरदार बखूबी निभाते हैं ।

अमित त्रिवेदी का संगीत फ़िल्म की गति के साथ अच्छे से मेल खाता है । 'दिल में मार्स है ’मनोरंजक और आकर्षक है । 'शाबाशियां' एक महत्वपूर्ण मोड़ पर प्ले होता है । अमित त्रिवेदी का बैकग्राउंड स्कोर बांधे रखने वाला है ।

एस रवि वर्मन की सिनेमैटोग्राफी काफी सिंपल है और बड़ी स्क्रीन पर प्रभावपूर्ण लगती है । संदीप रावडे का प्रोडक्शन डिजाइन असाधारण है । देबाशीष मिश्रा का साउंड डिज़ाइन भी उतना ही वास्तविक है जितना होना चाहिए । मेट्रो के अंदर लोन एक्शन सीन में शाम कौशल का एक्शन अच्छा है । फैमुलस मीडिया एंड एंटरटेनमेंट का वीएफएक्स शीर्ष स्तर का है जो कि लंबे क्लाइमेक्सस पर उतना अच्छा काम नहीं करता । Theia Tekchandaney की वेशभूषा आकर्षक है और ज्यादा ग्लैमरस नहीं है । विद्या बालन के लिए कीर्ति कोलवनकर और मारिया थारकन की वेशभूषा प्रामाणिक है । चंदन अरोड़ा की एडिटिंग एकदम सही है क्योंकि फिल्म न तो बहुत तेज चलती है और न ही खिंचती है ।

कुल मिलाकर, मिशन मंगल देशभक्ति के जज्बे से भरी एक आकर्षक और मनोरंजक फ़िल्म है । बॉक्सऑफ़िस पर इस फ़िल्म को दर्शकों का अटूट प्यार मिलेगा । इसी के साथ ये अक्षय कुमार की अब तक की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फ़िल्म बनने की क्षमता रखती है ।