हम सभी के अपनी-अपनी जिंदगी में अलग तरह के सपने और उद्देश्य होते हैं लेकिन एक सपना हम सबका कॉमन है और वो है, सबसे अमीर बनना । लेकिन सच्चाई ये कि आर्थिक रूप से कोई भी इस दुनिया में समान नहीं है । किसी के पास बहुत पैसा है और कोई ऐसा भी है जिसे अपनी दैनिक आजिविका चलाने के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ता है । राजेश कृष्णन ने फ़िल्म लूटकेस अमीर बनने के इस सपने के इर्द-गिर्द फ़नी अंदाज में बुनी गई फ़िल्म है । तो या लूटकेस दर्शकों को हंसाने में कामयाब होगी, या यह अपने प्रयास में विफ़ल हो जाती है, आइए समीक्षा करते हैं ।

Lootcase Movie Review: कैसी है मल्टीस्टारर कॉमेडी फ़िल्म लूटकेस, यहां पढ़ें

लूटकेस एक कॉमन मैन की कहानी है जो रातों-रात अमीर बनना चाहता है । नंदन कुमार (कुणाल खेमू) अपनी पत्नी लता (रसिका दुग्गल) और बेटे आयुष (आर्यन प्रजापति) के साथ मुंबई में एक चॉल में रहते हैं । वह एक प्रिंटिंग प्रेस में काम करता है और कड़ी मेहनत करने के बावजूद भी पर्याप्त नहीं कमा पाता । फ़िर उसे एक दिन रुपए से भरा सूटकेस मिलता है जिसे देखकर वह अलग-अलग सपने बुनने लगता है । इसके बाद आगे क्या होता है, यह पूरी फ़िल्म देखने के बाद पता चलता है ।

कपिल सावंत और राजेश कृष्णन की कहानी में कुछ भी नयापन नहीं है । इसकी शैली ऐसी है जो पिछली फ़िल्मों की याद दिलाती है । देली बेली, एक चालीस की लास्ट लोकल, ब्लैकमेल, फ़िर हेरा फ़ेरी इत्यादि । कपिल सावंत और राजेश कृष्णन की पटकथा अत्यधिक प्रभावी है । फिल्म में कई अजीब क्षण हैं जो हंसी लेकर आएंगे । कुछ सीन समझ के परे लगते हैं । फ़ाइल फिल्म में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है । कपिल सावंत के डायलॉग बहुत मजाकिया हैं । खासकर स्मार्ट वन-लाइनर्स प्रभाव को काफी बढ़ाते हैं ।

राजेश कृष्णन का निर्देशन अच्छा है और आसानी से समझने योग्य है । फ़िल्म में कई सारे ट्रैक्स हैं और सभी अच्छे से दर्शाए जाते हैं । सीन बदलने में कहीं भी कोई झटका सा महसूस नहीं होता है । कुछ सीन कुछ खास नहीं है लेकिन कुल मिलाकर, डेब्यू के तौर पर यह निर्देशक की अच्छी शुरूआत है ।

लूटकेस सेट में होने में थोड़ा समय लेती है । 15 से 20 मिनट तो किरदारों के परिचय में ही निकल जाते हैं । जब नंदन को सूटकेस मिलता है वहां से फ़िल्म दिलचस्पी जगाती है । फ़िल्म में सपोर्टिंग कलाकार बहुत हास्य जोड़ते हैं । हालांकि सेकेंड हाफ़ में फ़िल्म बिखरने लगती है । नंदन का फ्लैट खरीदने की कोशिश करना जरूरत से ज्यादा लंबाई बढ़ाता है । फ़िल्म का क्लाइमेक्स पागलपन से भरा है । फ़िल्म का फ़ाइनल सीन कई सारे सवाल उठाता है जिसके जवाब अधूरे रह जाते हैं । लेकिन इससे ज्यादा फ़र्क नहीं पड़ता है ।

कुणाल खेमू वास्तव में अच्छा प्रदर्शन करते हैं । उनकी कॉमिक टाइमिंग अव्वल दर्जे की है और वह अपने हिस्से को बहुत अच्छी तरह से निभाते हैं । रसिका दुग्गल प्यारी लगती हैं हाउसवाइफ़ का किरदार अच्छे से निभाती हैं । गजराज राव उत्कृष्ट हैं और जिस तरह से वह दूसरों को अपने काम करने के लिए राजी करते हैं, वह पसंद आएगा । विजय राज अपने चिर-परिचित अंदाज से अपने किरदार में जान लाते हैं । रणवीर शौरी फिल्म के सरप्राइज हैं । वह अपने जोश और कटाक्ष से हास्य लेकर आते हैं ।

फ़िल्म का संगीत कुछ खास नहीं है । समीर उद्दीन के बैकग्राउंड स्कोर में क्विर्की फ़ील है ।

Sanu John Varughese की सिनेमैटोग्राफी उपयुक्त है । चॉल के दृश्यों को विशेष रूप से अच्छी तरह से शूट किया गया है । Rateesh UK का प्रोडक्शन डिजाइन बहुत प्रामाणिक है । दिव्या और निधि गंभीर की वेशभूषा यथार्थवादी है। मनोहर वर्मा के एक्शन विशेष रूप से अंत में थोड़े रक्तरंजित हैं । आनंद सुबया का संपादन साफ-सुथरा है ।

कुल मिलाकर, लूटकेस एक अत्यधिक मनोरंजक और मज़ेदार फिल्म है जो अपने शानदार लेखन, सहज निर्देशन और प्रभावी प्रदर्शन के कारण काम करती है ।