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सिनेप्रेमी फ़िल्म निर्माता विनोद बच्चन से इतना वाकिफ़ नहीं होंगे लेकिन इन्होंने कई रॉम-कॉम फ़िल्में बनाई है । तनु वेड्स मनु [2011] इन्हीं फ़िल्मों में से एक थी जो इन्होंने प्रोड्यूस की थी । और अब एक बार फ़िर विनोद बच्चन लेकर आए हैं गिन्नी वेड्स सनी । तो क्या इस हफ़्ते रिलीज हुई फ़िल्म गिन्नी वेड्स सनी दर्शकों का मनोरंजन करने में कामयाब हो पाएगी, या यह अपने प्रयास में नाकाम होती है ? आइए समीक्षा करते हैं ।

Ginny Weds Sunny Movie Review: विक्रांत मैसी और यामी गौतम की शानदार केमिस्ट्री के लिए देख सकते हैं गिन्नी वेड्स सनी

गिन्नी वेड्स सनी, एक जोड़े के भ्रम और पागलपन की कहानी है । सतनाम सेठी उर्फ सनी (विक्रांत मैसी) अपने पिता पप्पी (राजीव गुप्ता), मां रीता (मेनका कुरुप) और बहन निम्मी (माजल व्यास) के साथ दिल्ली में रहता है । सनी अपने परिवार के हार्डवेयर स्टोर में अपने पिता के साथ काम करता है। हालाँकि, सनी को खाना बनाना पसंद है और वह ‘तिलक नगर तंदूरी नाइट्स’ नाम से एक रेस्तरां शुरू करना चाहता है । पप्पी शर्त रखता है कि सनी का सपना पूरा कर देगा बर्शते वह पहले शादी कर ले । सनी को सान्या (वीनस सिंह) नाम की एक लड़की में दिलचस्पी है, लेकिन जब सान्या को यह पता चल जाता है कि ह अपने रेस्तरां के सपने को पूरा करने के लिए उससे शादी करना चाहता है, वह उसे छोड़कर चली जाती है । उसी पड़ोस में शोभा जुनेजा (आयशा रज़ा) रहती है, जो एक मैचमेकर है । अफसोस की बात है कि वह अपनी ही बेटी सिमरन उर्फ गिन्नी (यामी गौतम) के लिए मैच नहीं खोज पा रही है । गिन्नी अरेंज मैरिज के खिलाफ है । स्कूल टाइम मे सनी का गिन्नी पर क्रश था । जब पप्पी शोभा से सनी के लिए एक मैच खोजने के लिए कहता है, तो वह उसे गिन्नी के साथ अफ़ेयर करने के लिए कहती है । सनी तैयार हो जाता है । फिर शोभा गिन्नी का दिल जीतने का तरीका बताती है सनी को । फ़िर सनी को एक दिन पता चलता है कि गिन्नी और निशांत राठी (सुहैल नैय्यर) अभी भी दोस्त हैं । जबकि दोनों ने 1 ½ पहले ब्रेकअप कर लिया था । लेकिन फ़िर भी सनी कोशिश नहीं छोड़ता है । आगे क्या होता है, ये आगे की फ़िल्म देखने के बाद पता चलता है ।

नवजोत गुलाटी और सुमित अरोड़ा की कहानी चिर-परिचित है । लेकिन नवजोत गुलाटी और सुमित अरोड़ा की पटकथा बहुत मनोरंजक है । लेखकों ने फ़िल्म में दिलचस्पी बनाए रखने के लिए कथा के दौरान कुछ नयापन लाने की पूरी कोशिश की है । यह कोई आसान काम नहीं है । जैसा कि पहले भी कहा कि कुछ सीक्वंस अनुमानित है । क्लाइमेक्स सीन भी ऐसी ही फ़िलिंग देता है । नवजोत गुलाटी और सुमित अरोड़ा के डायलॉग्स प्रफुल्लित करने वाले, स्वच्छ और बहुत मजाकिया हैं और फ़िल्म में मनोरंजन जोड़ते हैं ।

पुनीत खन्ना का निर्देशन साफ़ और सरल है । डेब्यू डायरेक्टर ने कई सीन को बहुत ही बेहतर ढंग से संभाला है । फिल्म की स्पीड न तो बहुत तेज है और न ही बहुत धीमी है और जिस तरह से गिन्नी और सनी एक दूसरे के प्यार में पड़ते हैं, यह सीन बहुत ही ऑर्गेनिक है । लेखकों ने फ़िल्म की कहानी को अनूठी बनाने का पूरा प्रयास किया है । इसके विपरित 125 मिनट लंबी फ़िल्म 5 से 10 मिनट और छोटी हो सकती थी, खासकर सेकेंड हाफ़ में > कुछ सिनेमाई स्वतंत्रता समझ के परे है ।

गिन्नी वेड्स सनी की शुरूआत बेहतर ढंग से होती है इसके बाद तुरंत किरदारों का उनके अनुसार परिचय कराया जाता है । गिन्नी का एंट्री सीन काफ़ी फ़नी है । इस फ़िल्म की खास बात ये है कि इसमें न केवल फ़िल्म के लीड कलाकारों ने बल्कि सपोर्टिंग कलाकारों ने भी फ़िल्म के मनोरंजन लेवल को बढ़ाने में अपना योगदान दिया है । यह पप्पी और शोभा के ऊपर तो बिल्कुल फ़िट बैठता है । शोभा का लव गुरु बनने वाला सीन देखने लायक है । मसूरी एपिसोड भी प्यारा है । निशांत का गिन्नी को प्रपोज करने वाला सीन काफ़ी नाटकिय है जो इंटरवल प्वाइंट पर आता, यदि फ़िल्म थिएटर में रिलीज होती । इंटरवल के बाद फ़िल्म थोड़ा बिखर सी जाती है और ह्यूमर भी कम हो जाता है । हालांकि कुछ सीन अच्छे हैं । फ़िनाले सीन कौतूहल पूर्ण है जो फ़न जोड़ता है ।

अभिनय की बात करें तो, विक्रांत मैसी बेहद शानदार परफ़ोर्मेंस देते हैं । विक्रांत अक्सर मेनस्ट्रीम फ़िल्मों का हिस्सा रहे हैं जहां इन्हें सपोर्टिंग किरदार के रूप में देखा गया है । लेकिन ये विक्रांत की मैन लीड हीरो के तौर पर पहली कमर्शियल फ़िल्म है जिसमें उन्होंने शानदार काम किया है । उनकी कॉमिक टाइमिंग और ओवरबोर्ड न जाने की उनकी कोशिश बहुत ही सराहनीय है । यामी गौतम ने बाला [2019] के बाद इसमें यादगार परफ़ोर्मेंस दिया है । वह अपने किरदार में जंचती हैं । स्पेशल मेंशन विक्रांत और यामी की शानदार केमिस्ट्री को जाना चाहिए । आयशा रजा अपने रोल में छा जाती है और फ़िल्म में उनका अहम रोल है । राजीव गुप्ता, जो हाल ही में वर्जन भानुप्रिया [2020] में नजर आए थे, तो अलग लेवल पर नजर आते हैं । उनके डायलॉग्स ह्यूमर लेकर आते हैं । माजल व्यास हालांकि एक छाप छोड़ते है । ईशा वी तलवार निष्पक्ष हैं । गुरप्रीत सैनी (सुमीत) मजाकिया हैं । अन्य कलाकार जो अच्छा करते हैं, वे हैं संचीता पुरी (प्रेरणा), वी पी कालरा (मेट्रो में पाइल्स चाचा), मुनीश देव मोहन (नेहा के पिता) और दीपक चड्ढा (नेहा के चाचा)।

संगीत ठीक है । 'सावन में लग गई आग' काफ़ी शानदार हैं और शुरूआत में ऐसा लगता है कि ये गाना एक प्रमोशनल सॉंग हैं लेकिन यह फ़िल्म का हिस्सा है । 'लोल' पैर थिरकाने वाला है, जबकि 'रुबरू' और 'फिर चल' का बैकग्राउंड में अच्छा इस्तेमाल किया गया है । 'फूंक फ़ूंक के' का फ़िल्म के प्री-क्लाइमेक्स और फिनाले में उपयोग किया गया है । प्रसाद एस का बैकग्राउंड स्कोर फिल्म की कथा के अनुरूप है ।

नथाइन नागराज की सिनेमैटोग्राफी साफ-सुथरी है और दिल्ली, नोएडा और मेट्रो नेटवर्क को अच्छी तरह से कैप्चर करती है । अश्विनी श्रीवास्तव का प्रोडक्शन डिजाइन आकर्षक है, खासकर गिन्नी और सनी के घर । मंदिरा शुक्ला की वेशभूषा ठीक है लेकिन यामी गौतम के लिए अमनदीप कौर की वेशभूषा बहुत ही ग्लैमरस और आकर्षक है । U & V Media का VFX औसत है । यह हॉट एयर बैलून सीक्वंस और बेहतर हो सकता था । संदीप सेठी का संपादन ठीक है ।

कुल मिलाकर, गिन्नी वेड्स सनी चिर-परिचित प्लॉट पर टिकी है लेकिन इसे इसकी अच्छी तरह से लिखी गई पटकथा और विक्रांत मैसी और यामी गौतम की जबरदस्त केमिस्ट्री के लिए देखा जा सकता है । इसके अलावा यह एक साफ़-सुथरी फ़िल्म है जिसमें न कहीं आपत्तिजनक शब्द हैं न ही अश्लील सीन । इस तरह से यह एक पारिवारिक मनोरंजक फ़िल्म है ।