वीडियो गेम कई लोगों के जीवन का एक अंतर्निहित हिस्सा हैं । आज के समय में, लोगों को अपने स्मार्टफ़ोन पर गेम खेलते देखना कोई असामान्य बात नहीं है । हॉलीवुड में वीडियो गेम पर ऐसी कई फ़िल्में बनी हैं और उनमे शामिल हैं- जुमानजी-वेलकम टू द जंगल[2017], रेडी प्लेयर वन [2018] इत्यादि । लेकिन बॉलीवुड में सिर्फ़ रा वन ही ऐसी फ़िल्म है जो वीडियो गेम पर बेस्ड थी । और अब इस हफ़्ते सिनेमाघरों में रिलीज हुई है एक और वीडियो गेम पर बेस्ड फ़िल्म गेम ओवर । यह एक डब हिंदी फिल्म है और मूल रूप से तमिल और तेलुगु में फिल्माई गई है । तो क्या यह फ़िल्म दर्शकों को रोमांचित करने में कामयाब होगी या यह अपने प्रयास में विफ़ल होती है ।

गेम ऑवर, एक गेमर के अंदर और बाहर की दुनिया के शैतान से लड़ने की कहानी है । दिसंबर 2017 में, गुरुग्राम के सेक्टर 101 में, अमृत (संचना नटराजन) नाम की एक युवा लड़की जब अपने घर में अकेली खाने का आंनंद ले रही थी तभी एक अज्ञात हत्यारा उस पर छुपकर नजर रखता है । और कुछ समय बाद वह हत्यारा उसके घर में घुसता है और उसके साथ बलात्कार करता है और उसे घसीट्कर फ़ुटबॉल मैदान पर ले जाता है । यहाँ, वह उसे मारता है और उसके शरीर को आग लगा देता है । एक साल बाद, सपना (तापसी पन्नू), जो गुरुग्राम के धनकोट में रहती है, का दुखद समय चल रहा है । वह एक वीडियो गेम डिजाइनर है और उसे वीडियो गेम की लत है । यह एक बड़े से घर में अपनी हाउस हेल्प कलामना (विनोदिनी वैद्यनाथन) के साथ अकेली रहती है । अमृता की हत्या के कुछ हफ़्ते बाद, सपना भी बुरे सदमे से गुजर रही है क्योंकि नए साल की पूर्व संध्या पर उसके साथ बलात्कार किया जाता है और इसे कैमरे में भी कैद कर लिया जाता है । और जैसे ही 31 दिसंबर करीबा ने को होता है उसे पैनिक अटैक आना शुरू हो जाता है । बलात्कार के बाद से, वह कुछ सेकंड से अधिक समय तक अंधेरे में नहीं रह पाती है । इसी बीच में, उसके सामने एक नई समस्या आ खड़ी होती है । उसकी कलाई पर एक गेम-केंद्रित टैटू है और यह बुरी तरह से दर्द करना शुरू कर देता है । त्वचा विशेषज्ञ के पास जाने से पहले, वह टैटू आर्टिस्ट वर्षा (राम्या सुब्रमण्यन) के पास जाती है, जिससे वो इसका हल निकाल सके । वर्षा ने झिझकते हुए उसे सूचित किया कि उसने गलती से सपना की कलाई पर ये स्मारक टैटू लगा दिया था । मतलब, अमृता की राख टैटू की स्याही में मिलाई गई थी । दरअसल इस स्याही का इस्तेमाल अमृता की मां डॉ रीमा (पार्वती टी) के टैटू के लिए किया जाना था, लेकिन गलती से इसे सपना पर लगा दिया गया । सपना इस बात से पूरी तरह अनजान थी । वह खुद को मारने का प्रयास करती है लेकिन बच जाती है । डॉ रीमा के साथ मुलाकात और फ़ाइटर अमृता के बारें में जानने के बाद सपना एक नए सिरे से जीवन जीना शुरू करने का फ़ैसला करती है । यहां से जिस किलर ने अमृता को मारा था अब वह सपना के पीछे पड़ जाता है । और 31 दिसंबर की रात वह सपना की हत्या करने का फ़ैसला करता है । इसके बाद आगे क्या होता है यह आगे की फ़िल्म देखने के बाद ही पता चलता है ।
अश्विन सारावनन और काव्या रामकुमार की कहानी विभिन्न पहलुओं की एक भेल पुरी है । यह फिल्म बलात्कार पीड़ितों,कैंसर पीड़ितों, सीरियल हत्याएं, वीडियो गेम की लत इत्यादि से ग्रस्त लोगों की कहानी को दर्शाती है । लेकिन किसी भी अच्छे से नहीं गूंथा है । अश्विन सारावनन और काव्या रामकुमार की पटकथा खराब और यादृच्छिक कहानी के कारण प्रभावित होती है । सेकेंड हाफ़ बेहतर है और बांधे रखता है । यद्यपि यह जुमांजी-वेलकम टू द जंगल की याद दिलाती है । श्रुति मदान के डायलॉग इतने प्रभावपूर्ण नहीं है और विनोदिनी वैद्यनाथन द्वारा लिखे गए गीतों को बेहतर लिखा जा सकता था ।
अश्विन सारावनन का निर्देशन अच्छा नहीं है । यद्यपि वह तकनीकीताओं को समझते है, लेकिन इसके प्लॉट के साथ न्याय करने में विफल रहते है और इसमें कोई हैरानी नहीं है क्योंकि इसके लेखन में भारी कमी है । कुछ सीन काफ़ी बांधे रखने वाले हैं लेकिन सेकेंड हाफ़ में एक सीक्वंस ऐसा है जो दर्शकों को हिला कर रख देगा । लेकिन उन्हें कहानी को साधारण बना चाहिए था और फ़िल्म को असम्बद्ध तरीके से द एंड नहीं करना चाहिए था । इसके अलावा फ़िल्म में बहुत सारी कमिया हैं ।
गेम ओवर की सबसे बड़ी समस्या ये है कि ये हिंदी में डब की गई है । जब मेकर्स इसे दो दक्षिणी भाषाओं में पहले से ही शूट कर रहे थे, तो उन्हें इसे हिंदी में भी शूट करना चाहिए था, खासकर जब इसकी लीड एक्ट्रेस तापसी पन्नू थी जो बॉलीवुड की एक लोकप्रिय अभिनेत्री हैं । फिल्म को दक्षिण में शूट किया गया है, लेकिन निर्माता इसे गुरुग्राम के रूप में दर्शाने का प्रयास करते हैं लेकिन यह काम नहीं करता है । न केवल बाहरी सेटिंग बल्कि अंदरूनी सेटिंग भी समझ के परे लगती है । अपनी जिंदगी बसर करने के लिए सपना आखिर करती क्या है जबकि वह एक बड़े बंगले का खर्चा आसानी से उठा सकती है ? इतनी बड़ी जगह होने के बावजूद, सपना के पास अपना खुद का बेडरूम नहीं है और वह सोफे पर सोती है जो कमरे में अपना काम करती है । और इसके बारें में कोई बैकग्राउंड स्टोरी नहीं बताई जाती । वास्तव में, बहुत सारी चीजों को अंत तक अबूझ सा छोड़ दिया जाता है और यही चीज फ़िल्म के प्रभाव को कम कर देता है । पूरा बलात्कार एपिसोड जरा भी टच नहीं करता है । इसके अलावा, फिल्म की शैली बदलती रहती है । इसकी शुरूआत एक हिंसक क्राइम ड्रामा के रूप में होती है । इसके बाद में, यह एक मनोवैज्ञानिक थ्रिलर बन जाती है, जो हिंदी फिल्म फ़ोबिया [2016] की याद दिलाती है । जिस दृश्य में सपना डॉ रीमा से मिलती है, वह एक भावनात्मक सीन है । सेकेंड हाफ़ बिल्कुल अलफ़ तरह का होता है । यहां आया ट्विस्ट में कुछ नयापन लगता है और फ़िल्म में दिलचस्पी बढ़ती है । यह पूरी तरह से एक्शन से भरपूर है और दर्शकों को मनोरंजन करने में कुछ हद तक मदद करती है । लेकिन यह पूरी तरह से दर्शकों को प्रभावित करने के लिए पर्याप्त नहीं है ।
तापसी पन्नू हमेशा की तरह अपने किरदार में समाई हुई नजर आती है । बहुत कम अभिनेत्रियाँ एक जोश के साथ इस तरह की भूमिका निभा सकती हैं और तापसी निश्चितरूप से प्रभावित कर जाती है । वह लगातार कमजोर पटकथा से ऊपर उठने की कोशिश करती है । विनोदिनी वैद्यनाथन का एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा है और वो अपने रोल में जंचती है । राम्या सुब्रमण्यन स्क्रीन पर काफ़ी अच्छी लगती है । संचना नटराजन काफी पसंद करने वाली हैं । उनका ट्रैक दिल दहला देने वाला है, और इस तरह की फ़िल्मों में वह मिसफ़िट सी लगती है । अनीश कुरुविला (मनोचिकित्सक) कामचलाऊ हैं ।
रॉन एथन योहन का संगीत प्राणपोषक है । शुरुआती क्रेडिट के दौरान थीम का प्ले होना शानदार है । इस तरह की फिल्म के लिए वसंत की सिनेमैटोग्राफी उपयुक्त है । सचिन सुधाकरन और हरिहरन एम का साउंड डिज़ाइन कुछ खास नहीं है और फिल्म की शैली को देखते हुए और बेहतर होना चाहिए था । शिव शंकर का कला निर्देशन शालीन है । रियल सतीश के स्टंट और एन के नंदिनी की वेशभूषा यथार्थवादी हैं । रिचर्ड केविन ए का संपादन उल्लेखनीय नहीं है ।
कुल मिलाकर, गेम ओवर एक ऐसी फ़िल्म है जिसमें है तो बहुत कुछ लेकिन सब कुछ उलझा सा होने के कारण कुछ भी वांछित प्रभाव नहीं डालता है । फ़िल्म को लेकर कोई चर्चा नहीं और इसलिए गेम ओवर को बॉक्स ऑफ़िस पर दर्शक जुटाने में काफ़ी संघर्ष करना होगा ।
















