ये शुरू हुआ साल 2002 में, जब विक्रम भट्ट ने बिपाशा बसु, डिनो मोरिया और मालिनी शर्मा के साथ डारवनी फ़िल्म राज निर्देशित की थी । इस फ़िल्म की अभूतपूर्व सफ़लता के बाद आई राज- द मिस्ट्री कन्टिन्यू और राज 3 । इस हफ़्ते बॉक्सऑफ़िस पर रिलीज हुई राज फ़्रेंचाइजी की चौथी किश्त राज रीबूट, जिसमें इमरान हाशमी, कीर्ति खरबंदा, गौरव अरोड़ा मुख्य भूमिका में नजर आए हैं । क्या राज रीबूट बॉक्सऑफ़िस पर 'राज-माताओं' के नाम से हिट होगी या इसे खुद 'रीबूट' होने की जरूरत है ।
विशेष फ़िल्म्स और टी-सीरिज की राज रीबूट आवश्यकरूप से एक डरावनी फ़िल्म है जो कई रहस्य, मानव के लक्षण और दुष्ट आत्माओं का पता लगाती है । फ़िल्म की शुरूआत होती है रोमानिया की सुरम्य स्थानों के बीच प्यार और जिंदगी के बारे में बयां करते हुए वॉइसओवर से । ये वो जगह है जहां विवाहित जोड़ा रेहान खन्ना (गौरव अरोड़ा) और उसकी पत्नी शायना खन्ना (कीर्ति खरबंदा) हाल ही में यहां शिफ़्ट हुए हैं । इसके बाद, फ़िल्म थोड़ी फ़्लैशबेक की घटनाओं में चली जाती है, जो रेहान के रोमानिया में बसने के प्रतिरोध और अनिच्छा को दर्शाती है । शायना की जिद के कारण रेहान मुंबई में अपना ठीकठाक जॉब छोड़कर रोमानिया शिफ़्ट हो जाता है और रोमानिया में एक काफ़ी अच्छा जॉब पा लेता है । लेकिन रोमानिया शिफ़्ट होने के बाद से शायना महसूस करती है कि उसके और रेहान के बीच कुछ गलत हो रहा है साथ ही रेहान का उसके प्रति रवैया भी कुछ बदल सा गया है । जब शायना रेहान से इस मुद्दे पर लगातार सवाल पूछती है तो उसे कोई जवाब नहीं मिलता, तब शायना बहुत दुखी और निराश हो जाती है । इन सबके बीच, शायना अपने घर में किसी की आहट सुनाई और दिखाई देती है और जब भी वो ये बात रेहान से शेयर करती है, रेहान उसकी बात को अनसुना ही करता है । और यही वो समयहै जब उदास और प्यार के लिए तरस रही शायना का फ़ैशन फ़ोटोग्राफ़र आदित्य श्रीवास्तव (इमरान हाशमी) से सामना होता है । आदित्य न केवल शायना की स्थिती को समझता है बल्कि उसे उसके जीवन में भूतहा घटनाओं पर काबू पाने में सहायता प्रदान भी करता है । एक दिन, जब रेहान किसी काम से बाहर जाता है, तब आदित्य शायना से कुछ रहस्यमयी बातों को बताने के लिए मिलता है और ये रहस्य शायना को पूरी तरह से झकझोर कर रख देता है । क्या आदित्य वास्तव में शायना को उस पर दुष्ट आत्मा द्दारा हमला करने के पीछे के कारणों को बताता है, क्यों वह बिना वजह शायना की मदद करता है और रेहान इन सब चीजों से कैसे जुड़ा हुआ है, यह सब फ़िल्म देखने के बाद ही पता चलता है ।
जब राज रीबूट का ट्रेलर रिलीज हुआ था, तब इसने दर्शकों के बीच एक जिज्ञासा जगा दी थी । और इस मामले में फ़िल्म जरा भी निराश नहीं करती है । यद्यपि, राज रीबूट की पटकथा (विक्रम भट्ट) कभी-कभी घिसी पीटी सी लगने लगती है । यह निश्चितरूप से कसी हुई और बांधे रखने वाली है । यह सफ़लतापूर्वक सम्मोहित कर दर्शकों को फ़िल्म से अंत तक बांधे रखती है । और इस एक वजह से दर्शकों का ध्यान अंत तक बना रहता है । इस फिल्म की कथा सरल और स्पष्ट है । फ़िल्म में ऐसे कई याद रखने वाले और कटु संवाद (गिरीश धमीजा) हैं, विशेषरूप से सेकेंड हाफ़ में ।
हालांकि राज रीबूट की कहानी का आधार निर्देशक विक्रम भट्ट का पसंदीदा विषय है, पर फ़िल्म में कुछ एक बातें अटपटी सी लगती हैं । और फ़िर उनका निर्देशन सेंकेड हाफ़ के पास-पास डगमगाता सा दिखता है पर वो उसे संभालने में कामयाब रहे हैं । हालांकि फ़िल्म का फ़र्स्ट हाफ़ थोड़ा धीमा है लेकिन फ़िल्म का सेकेंड हाफ़ हॉरर और रहस्य के एलीमेंट्स के साथ तेजी से रफ़्तार पकड़ता है । फ़िल्म में सेक्स एलीमेंट का अभाव है, जो कि भट्ट और इस शैली से संबंधित फिल्मों का प्रधान गुण हैं । यह कहने के बाद, इस फ़िल्म में ऐसे कई सीन है जो वाकई बहुत मजेदार हैं । जैसा की एक सीन है, जिसमें कीर्ति खरबंदा शॉपिंग करते करते अपने घर की ओर भागती है, और उनका सामना, जादू-टोनो के बीच होते श्लोकों के जपों से होता है ।
राज फ़्रेंचाइजी की पहले आई राज फ़िल्में ( राज, राज- द मिस्ट्री कन्टिन्यू और राज 3),में इमरान हाशमी निश्चित रूप से अपने घरेलू अधिकार क्षेत्र में काफ़ी सहज लगते हैं । हालांकि फ़िल्म में 'इमरान-वाद' पुरजोर रूप से नहीं दिखाई दिया जिसके चलते दर्शक थोड़ा निराश हो सकते हैं, फ़िर भी उन्होंने अपने किरदार के साथ पूरा न्याय करने की और कहानी को रफ़्तार देने की पूरी कोशिश की है । गौरव अरोड़ा के साथ उनके टकराव के सीन को मिस मत कीजिए । गौरव अरोड़ा के बारें में बात करें तो, इस फ़िल्म में उन्होंने बेहतरीन अभिनय किया है । वह अपने रोल में खूब जंचे हैं । राज रीबूट फ़िल्म उनके बॉलीवुड करियर में पंख लगा सकती है । हालांकि, फिल्म का सबसे बड़ा आश्चर्य कीर्ति खरबंदा है । फ़िल्म में स्क्रीन पर उनकी उपस्थिती और शानदार अदायगी फ़िल्म देखने के लिए मजबूर कर सकती है । यद्यपि राज रीबूट उनकी पहली बॉलीवुड फ़िल्म है लेकिन वो फ़िल्म में एक नवोदित अभिनेत्री के रूप में बिल्कुल नजर नहीं आईं बल्कि काफ़ी अनुभवी लगी हैं । फिल्म अनिवार्य रूप से ऊपर उल्लिखित तिकड़ी (इमरान हाशमी, कीर्ति खरबंदा, गौरव अरोड़ा) के अंतर्गत आती है, बाकी के कलाकार फ़िल्म को आगे बढ़ाने में मदद करते हैं ।
राज रीबूट का संगीत (जीत गांगुली, संगीत हल्दीपुर, सिद्धार्थ हल्दीपुर) विन्रम है और दर्शकों को बांधे रखने में कामयाब होता है । वहीं दूसरी तरफ़, फ़िल्म का बेकग्राउंड स्कोर (राजू सिंह) और साउंड इफ़ेक्ट इस फिल्म की कथा के साथ सिंक में रहते हुए पूरी तरह से मेल खाते हैं और फ़िल्म देखने के अनुभव को बढ़ाते है ।
फिल्म का छायांकन (मनोज सोनी) अच्छा है । फिल्म का संपादन (कुलदीप मेहन) औसत है ।
कुल मिलाकर, राज रीबूट एक अपरंपरागत डरावनी कहानी प्रस्तुत करती है जो आपको डराएगी । यदि आप अलौकिक रोमांचक/हॉरर फिल्मों के शौकीन हैं, तो इस फ़िल्म के साथ डरने और सरप्राइज होने के लिए तैयार हो जाइए ।
















