फ़िल्म :- कुली

कलाकार :- रजनीकांत, नागार्जुन, सौबिन शाहिर, आमिर खान

निर्देशक :- लोकेश कनगराज

रेटिंग :- 3/5

Coolie Movie Review: स्टाइलिश एक्शन और ट्विस्ट के कारण मास अपील रखती है कुली ; रजनीकांत का स्वैग बना फ़िल्म की USP

संक्षिप्त में कुली का प्लॉट :-

कुली की कहानी एक ऐसे आदमी की है जो एक खतरनाक गैंगस्टर से लड़ता है। देवा (रजनीकांत) चेन्नई में एक हॉस्टल जैसी सुविधा चलाता है। एक दिन उसे पता चलता है कि उसका पुराना दोस्त, राजशेखर (सत्यराज) का निधन हो गया है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के मुताबिक, उसकी मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई। लेकिन देवा को पता चलता है कि राजशेखर की हत्या की गई है। आगे की जांच में सामने आता है कि वह कुख्यात कारोबारी, साइमन (नागार्जुन) के लिए काम करता था। राजशेखर ने एक ऐसा उपकरण बनाया था, जिससे साइमन को काफी फायदा हुआ। देवा, राजशेखर की जगह लेता है और चतुराई से साइमन के गैंग का हिस्सा बन जाता है। देवा की मदद करती है राजशेखर की बेटी, प्रीति (श्रुति हासन)। आगे क्या होता है, यही फिल्म की बाकी कहानी है।

कुली मूवी स्टोरी रिव्यू :-

लोकेश कनागराज की कहानी मनोरंजक है लेकिन कई जगह उलझ भी जाती है। लोकेश कनागराज की पटकथा (जिसमें चंद्रु अंबाझगन का अतिरिक्त योगदान है) थोड़ी कमजोर है, लेकिन इसमें कई ड्रामेटिक और मास अपील वाले पल भी हैं। किरदार अच्छी तरह गढ़े गए हैं। लोकेश कनागराज और चंद्रु अंबाझगन के डायलॉग दमदार और हीरोइक हैं।

लोकेश कनागराज का निर्देशन उम्मीद के मुताबिक मास अपील से भरपूर है। इसमें कोई शक नहीं कि हीरो को शानदार अंदाज में पेश करने और उन्हें ऊँचाई देने में लोकेश माहिर हैं, और इस मामले में वे निराश नहीं करते। फिल्म में कुछ ऐसे ट्विस्ट हैं जो दर्शकों को चौंका देंगे। मेंशन (हवेली) में होने वाले एक्शन सीन और ट्रेन में चल रहे पागलपन को जिस तरह जोड़ा गया है, वह काबिल-ए-तारीफ है। फिनाले को फैन्स खूब पसंद करेंगे।

कमजोरी की बात करें तो ट्विस्ट को छोड़ दें तो कहानी में थोड़ी कसावट की कमी है। कई जगह घटनाक्रम उलझा हुआ और अविश्वसनीय लगता है। दयाल का ट्रैक शुरू में दिलचस्प है लेकिन एक समय बाद लंबा खिंच जाता है।

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परफॉरमेंस :-

रजनीकांत जबरदस्त फॉर्म में हैं। काबिले-तारीफ है कि इस उम्र में भी वह इतनी बेहतरीन परफॉर्मेंस देते हैं और दर्शकों को रोमांचित कर देते हैं। उनका यंग अवतार थिएटर्स में जबरदस्त क्रेज पैदा करेगा। नागार्जुन अपने दुर्लभ विलेन वाले किरदार में छा जाते हैं। सौबिन शाहिर (दयाल) चमकते हैं और फिल्म का सरप्राइज पैकेज साबित होते हैं। श्रुति हासन अच्छा सहयोग देती हैं और अपनी मजबूत मौजूदगी बनाए रखती हैं। सत्यराज का स्क्रीन टाइम सीमित है, लेकिन फिर भी वह असर छोड़ जाते हैं। उपेंद्र (कलीशा) कैमियो में इंप्रेस करते हैं। आमिर खान (दाहा) शानदार हैं। पूजा हेगड़े फिल्म में ग्लैमर का तड़का लगाती हैं।

कुली मूवी म्यूजिक और अन्य तकनीकी पहलू :

अनिरुद्ध रविचंदर का संगीत जोशीला है। ‘कूली डिस्को’, ‘चिकितु’, ‘आई ऐम द डेंजर’, ‘मॉब्स्टा’ और ‘पावरहाउस’ खासतौर पर ध्यान खींचते हैं। ‘मोनिका’ भी पेप्पी है, लेकिन इसे कहानी में थोड़ा जबरन जोड़ा गया लगता है। अनिरुद्ध का बैकग्राउंड स्कोर फिल्म की थीम के साथ पूरी तरह मेल खाता है।

गिरीश गंगाधरन की सिनेमैटोग्राफी शानदार है। अनबरिव का एक्शन बेहद खूनखराबे वाला (गोरी) है। सतीश कुमार का प्रोडक्शन डिजाइन और प्रवीन राजा की कॉस्ट्यूम डिजाइनिंग यथार्थपूर्ण है। फिलोमिन राज की एडिटिंग थोड़ी और टाइट हो सकती थी।

क्यों देंखे कुली ?

कुल मिलाकर, कुली में रजनीकांत के भरपूर मास मोमेंट्स और स्वैग मौजूद हैं । हालांकि, कुछ जगहों पर फीकी राइटिंग फिल्म की रफ्तार में रुकावट डालती है। फिर भी, फिल्म के चारों ओर बने हाइप और लंबे वीकेंड की वजह से हिंदी भाषी बाजारों में इसके अच्छा प्रदर्शन करने की संभावना है।