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टाइगर श्रॉफ को इंडस्ट्री में आए हुए महज 6 साल हुए हैं लेकिन उन्होंने अपने खतरनाक एक्शन, डांस और अभिनय से बॉलीवुड में एक अलग मुकाम हासिल कर लिया है । टाइगर की बागी फ़्रैंचाइजी को दर्शकों द्दारा खूब पसंद किया गया । इस फ़्रैंचाइजी के पहले भाग बागी [2016] ने इसके दूसरे भाग बागी 2 को बनाने के लिए प्रेरित किया । बागी 2 जबरदस्त हिट साबित हुई और इसने बॉक्सऑफ़िस पर 164.38 करोड़ की कमाई की । और इसके बाद मेकर्स ने बागी 3 लाने का फ़ैसला किया । बागी 3 में मेकर्स में एक्शन और विजुअल्स का स्तर काफ़ी ऊंचा रखा । इस हफ़्ते रिलीज हुई बागी 3 क्या दर्शकों को मनोरंजित करने में कामयाब होगी, या यह अपने प्रयास में विफ़ल हो जाएगी ? आइए समीक्षा करते है ।

Baaghi 3 Movie Review: खतरनाक एक्शन-दमदार परफ़ोरमेंस का पैकेज है टाइगर श्रॉफ की बागी 3

बागी 3, एक आतंकवादी संगठन के खिलाफ एक आदमी की कहानी है । रॉनी (टाइगर श्रॉफ) विक्रम (रितेश देशमुख) का छोटा भाई है । उनके पिता चरण चतुर्वेदी (जैकी श्रॉफ) पुलिस में थे, जो कि मर चुके है । चरण को पता है कि रोनी उसके दोनों बेटों में ज्यादा बहादुर है इसलिए वह विक्रम का ख्याल रखने के लिए रोनी से वादा लेता है । दोनो बड़े होते है, विक्रम पुलिस फ़ोर्स ज्वाइन कर लेता है और उसकी पोस्टिंग आगरा के लोहामंडी पुलिस स्टेशन में होती है । अपनी ड्यूटी के पहले दिन, बाजवा नामक एक गुंडे ने लोहामंडी पुलिस स्टेशन परिसर के अंदर एक व्यक्ति को आग लगा दी । बाजवा के वरिष्ठ आईपीएल (जयदीप अहलावत) सामने आकर दोषी को बचा ले जाता है और पुलिस भी कोई केस फ़ाइल नहीं करती है । ऐसा इसलिए है क्योंकि आईपीएल का स्थानीय लोगों के साथ-साथ पुलिस पर भी खौफ है । आईपीएल का मुख्य व्यवसाय पूरे परिवारों का अपहरण करना है, लेकिन वह फिरौती नहीं मांगता है । इसने हमेशा पुलिस को चकमा दिया है । पुलिस को पता नहीं है कि आईपीएल दुनिया के सबसे बड़े आतंकवादी संगठन जैश-ए-लश्कर के नेता अबू जलाल गज़ा के लिए काम करता है । वे सीरिया से बाहर काम करते हैं और लगभग पूरे देश में अपना कब्जा जमा चुके हैं । आगरा में, लोहामंडी पुलिस स्टेशन में अपहरण की शिकायत दर्ज होती है, लेकिन वह कार्यवाही करने से डरते है । इसलिए, वे विक्रम को बलि का बकरा बनाने का फैसला करते हैं । विक्रम घबरा जाता है और वह रॉनी से मदद मांगता है । रॉनी आईपीएल की फैक्ट्री में विक्रम के साथ जाता है, जहां अपहृत लोगों को रखा जाता है । रोनी आईपीएल के गुंडों को रोशनी बंद करके परेशान करता है । हर कोई मानता है कि उन्हें पीटने और बंधकों को बचाने के लिए विक्रम जिम्मेदार है । वह रातोंरात हीरो बन जाता है । विक्रम इस बीच रूचि (अंकिता लोखंडे) से शादी कर लेता है । उसकी बहन सिया (श्रद्धा कपूर) है रॉनी को डेट करना शुरू कर देती है । जब तक विदेश मंत्रालय विक्रम को सीरिया नहीं भेजता तब तक जीवन अच्छा चल रहा है । विक्रम पर आईपीएल को गिरफ्तार करने और उनके प्रत्यर्पण की प्रक्रिया को आसान बनाने की जिम्मेदारी दी है । यह काफी आसान काम लगता है । विक्रम वहां पहुंचता है लेकिन यहां उसे अबू के आदमी उसका अपहरण कर लेता है । कोई विकल्प न हो ने के कारण रोनी अब सीरिया जाने का फ़ैसला करता है । इसके बाद आगे क्या होता है, यह आगे की फ़िल्म देखने के बाद पता चलता है ।

बागी 3, आंशिक रूप से 2012 की तमिल हिट फिल्म, VETTAI से प्रेरित है । साजिद नाडियाडवाला की कहानी मनोरंजक है लेकिन एक कमजोर कथानक पर टिकी है । फरहाद सामजी की पटकथा (आदर्श खेतरपाल की अतिरिक्त पटकथा, ताशा भाम्बरा, मधुर शर्मा) केवल फ़र्स्ट हाफ़ में प्रभावी है । एक्शन और स्थिती के लिहाज से फ़िल्म में थोड़ा नयापन है और यह दिलचस्पी को बनाए रखता है । फरहाद सामजी के संवाद बहुत ही मनोरंजक और मजाकिया हैं ।

अहमद खान का निर्देशन औसत है । वह इस पैमाने की फ़िल्म को बहुत ही बारीकि के साथ हैंडल करते है । बागी 2 ने राष्ट्रवाद पर अधिक ध्यान केंद्रित किया लेकिन यहां ऐसा नहीं है । लेकिन इसमें भारत-पाकिस्तान भाईचारे पर एक अच्छी टिप्पणी की गई है । निर्देशक ने फ़िल्म की गति को अपने कंट्रोल में रखा है जिससे फ़िल्म जरा भी खीची हुई सी न लगे । फ़र्स्ट हाफ़ में उनका निर्देशन ठीक है लेकिन सेकेंड हाफ़ में ये फ़िसल जाता है । सबसे बड़ी समस्या ये है कि रोनी ऐसा नहीं लगता है कि रॉनी किसी देश के खिलाफ है । इसके अलावा, यह वास्तव में एक देश ही नहीं था बल्कि एक टाउनशिप थी जिसे मेकर्स चाहते हैं कि दर्शक एक देश के रूप में माने ।

बागी 3 की शुरूआत, थोड़ी अजीब होती है । बच्चे के रूप में रोनी एक बड़े बच्चे को हीरो स्टाइल में पीटता है, जो कि समझ के परे लगता है । हालांकि चतुर्वेदी की मौत का सीन एक अच्छा इमोशनल पल लेकर आता है । सिया की एंट्री काफ़ी मजेदार है जबकि वयस्क रॉनी के मजेदार सीन है जिन्हें फ़ैंस द्दारा पसंद किया जाएगा । अबू जलाल गाजा के दृश्य सतही लगते हैं लेकिन शुक्र है कि फ़र्स्ट हाफ़ में काफ़ी मजेदार है । फ़िल्म में ह्यूमर का हिस्सा अच्छे से मैनेज किया गया है । वो सीन जहां, आईपीएल के पुरुषों ने रॉनी का अपहरण किया और बाद में जिस तरह से डरने का नाटक किया, वह प्रफुल्लित करने वाला है । और फिर विक्रम और त्रिपाठी (वीरेंद्र सक्सेना) को लेकर एक भावनात्मक सीन सामने आता है । इंटरमिशन प्वाइंट तब होता है जब विक्रम को ले जाया जाता है । इसके बाद लगता है कि अब सेकेंड हाफ़ में कुछ रोमांचक देखने को मिलेगा खासकर रॉनी सीरिया जाएगा इत्यादि । अख्तर लाहोरी (विजय वर्मा) का परिचय भी फिल्म में फ़न जोड़ता है । लेकिन यहाँ से, चीजें काफी समझ के परे लगने लगती है, खासकर जिस तरह से रोनी अबू जलाल की पूरी सेना को आसानी से हरा देता हैं । जैदी काफ़ी खतरनाक लगता है लेकिन इतनी आसानी से खत्म हो जाता है यह मूर्खतापूर्ण है । क्लाइमेक्स में एक ट्विस्ट है जो दर्शकों को पसंद आ सकता है ।

अभिनय की बात करें तो, बागी 3 पूरी तरह से टाइगर श्रॉफ़ के मजबूत कंधों पर टिकी हुई है और उम्मीद के मुताबिक वह इसमें जरा भी निराश नहीं करते है । इसमें उनकी कॉमिक टाइमिंग भी देखने लायक है । एक्शन के मामले में उनका कोई मुकाबला नहीं है और इस मामले में उनके फ़ैंस का, पूरा पैसा वसूल है । श्रद्धा कपूर काफ़ी खूबसूरत लगती है और शानदार प्रदर्शन देती है । वह एक या दो सीन में वो थोड़ा ओवर लगती है लेकिन कुल मिलाकर वह दुर्भाषी [अभद्र भाषा बोलने वाली] रोल में एकदम जंचती है । हालांकि स्क्रीन पर उनकी मौजूदगी काफ़ी सीमित है । अब क्योंकि वह फ़िल्म में एक आक्रामक किरदार निभा रही हैं इसलिए आईडली एक्शन सीन में भी हाथ आजमाना चाहिए था । रितेश देशमुख अपना किरदार बखूबी निभाते है और फ़िल्म में फ़न और मैडनेस को जोड़ते है । उन्हें क्लाइमेक्स में काफ़ी पसंद किया जाएगा । दिलचस्प बात है कि, उन्होंने ऐसा ही रोल अपने मराठी प्रोडक्शन फ़िल्म MAULI [2018] में निभाया था । अंकिता लोखंडे को लिमिटेड स्कोप मिलता है लेकिन इसमें भी वह अपनी मौजूदगी दरज कराती है । विजय वर्मा बहुत मनोरंजक लगते हैं । जयदीप अहलावत पर उनका रोल जंचता है और क्लाइमेक्स से ठीक पहले उनका अहम रोल है । जमील खुरे खलनायक के रूप में जंचते हैं, लेकिन वह और अधिक खौफ़नाक लग सकते थे । शिफूजी शौर्य भारद्वाज (मिश्रा) बर्बाद हो जाते है । वीरेंद्र सक्सेना हमेशा की तरह भरोसेमंद लगते है । सतीश कौशिक (कमिश्नर चटोरा) और फरहाद सामजी (टॉयलेट में आदमी) हंसी लेकर आते है । मानव गोहिल (आसिफ़), श्रीश्वर (हाफ़िज़ा), दानिश भट (बिलाल), इवान कोस्टाडिनोव (अबू के गुर्गे), सुनीत मोरारजी (शरद कुटे), अमित शर्मा (बाजवा) और करण सिंह (जैदी) निष्पक्ष हैं । जैकी श्रॉफ का कैमियो फिल्म में अच्छा योगदान देता है । दिशा पटानी सिजलिंग लगती हैं ।

बागी 3 का संगीत अच्छा है । 'दस बहने 2.0' एक बेहतरीन रीमिक्स है और अंत क्रेडिट में प्ले किया जाता है । 'भंकस' अच्छे से फ़िल्माया गया है । "डु यू लव मी' निष्क्रिय है क्योंकि यहां एक फ़ास्ट गीत की जरूरत थी । 'गेट रेडी टू फाइट - रीलोडेड' एक्शन दृश्यों के दौरान प्ले किया जाता है । 'तेरे जैसा यार कहां" काम नहीं करता है । जूलियस पैकीम का बैकग्राउंड स्कोर हालांकि प्रभाव को बढ़ाता है ।

संता कृष्णन रविचंद्रन की सिनेमैटोग्राफी न केवल सीरिया सीन्स बल्कि एक्शन सीन को भी अच्छे से कैप्चर करती है । अहमद खान का एक्शन डिज़ाइन और राम चेला, लक्ष्मण चेला, Kecha Khamphakdee की एक्शन कोरियोग्राफी शानदार है और दर्शकों को बांधे रखती है । हालांकि एक्शन सीन थोड़े रक्तरंजित है लेकिन इसमें एक सीमा बनाई जाती है और विजुअली अच्छे लगते है । मानिनी मिश्रा का प्रोडक्शन डिजाइन बेहतर है । फ़िल्म देखकर पता लग सकता है कि इसे एक बेहतरीन फ़िल्म बनाने के लिए पैसा पानी की तरह बहाया गया है । अकी नरूला, करिश्मा गुलाटी और आशीष शर्मा की वेशभूषा (तान्या घावरी द्वारा स्टाइल के साथ) आकर्षक है । Redefine, NY VFXWaala, Resonance Digital और Red Chillies.VFX का VFX कमोबेश ठीक है । रामेश्वर एस भगत की एडिटिंग स्लिक है, लेकिन कुछ जगहों पर यह अनावश्यक रूप से झटकेदार है ।

कुल मिलाकर, बागी 3 टाइगर श्रॉफ की दमदार परफ़ोरमेंस, रोमांचक एक्शन और स्टनिंग विजुल्स का शानदार पैकेज है । बॉक्सऑफ़िस पर यह फ़िल्म निश्चितरूप से लक्षित दर्शकों को आकर्षित करेगी । छोटे शहरों में टाइगर के डाय हार्ड फैंस और एक्शन को पसंद करने वाले लोगों को यह फ़िल्म आकर्षित करेगी ।